वॉशिंगटन, 09 अप्रैल।
ईरान में युद्धविराम की घोषणा के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ग्रीनलैंड को लेकर अपनी महत्वाकांक्षा जताई और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को चेतावनी दी है। ट्रंप ने नाटो पर ईरान युद्ध के दौरान सहयोग न देने का आरोप लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड पर अमेरिका के नियंत्रण की इच्छा दोहराई और नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ हुई बैठक में इस बात पर नाराजगी जताई कि संकट के समय संगठन साथ नहीं आया। बंद कमरे में हुई इस बैठक के बाद ट्रंप ने अपनी शिकायत सार्वजनिक रूप से भी दोहराई।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट में लिखा कि जब अमेरिका को नाटो की जरूरत थी, तब संगठन वहां मौजूद नहीं था और भविष्य में भी ऐसा ही होगा। उन्होंने ग्रीनलैंड का उल्लेख करते हुए इसे बड़ा और खराब तरीके से चलाया गया बर्फ का टुकड़ा बताया।
इससे पहले जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया, तो ट्रंप ने संकेत दिए कि यदि नाटो देशों ने अमेरिका की अपील को नजरअंदाज किया तो वह संगठन से बाहर निकलने पर विचार कर सकते हैं। यूरोपीय देशों ने अमेरिकी आह्वानों का समर्थन नहीं किया और कई ने हमलों का विरोध भी किया, जिससे ट्रंप का रुख कड़ा हो गया।
ग्रीनलैंड, डेनमार्क का अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। वर्ष की शुरुआत में ट्रंप ने इसे हासिल करने की इच्छा जताई थी, लेकिन नाटो महासचिव से बातचीत के बाद उन्होंने अस्थायी रूप से पीछे हट गए थे।
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में 2023 में पास किए गए कानून के अनुसार, किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को नाटो से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक है। ट्रंप लंबे समय से नाटो के आलोचक रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कहा था कि उन्हें अकेले ही निर्णय लेने का अधिकार है।
नाटो की स्थापना 1949 में यूरोपीय सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई थी। इसके 32 सदस्य देशों का मुख्य उद्देश्य आपसी रक्षा है, जिसमें एक पर हमला सभी पर हमला माना जाता है।




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