नई दिल्ली, 09 अप्रैल।
पश्चिम एशिया में सीजफायर को लेकर अनिश्चितता के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। ब्रेंट क्रूड आज 2.50 प्रतिशत से अधिक बढ़कर कारोबार कर रहा है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड 3.50 प्रतिशत से अधिक उछल गया।
सीजफायर की घोषणा के कुछ घंटे बाद ही अमेरिका ने ईरान की शर्तों को अवास्तविक और अस्वीकार्य बताया। इसी बीच, इजरायल ने लेबनान में हमला कर लगभग 250 लोगों की मौत होने की खबर सामने आई। ईरान ने प्रतिक्रिया में हॉर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी दी और कहा कि सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन हुआ है। इसके बाद से हॉर्मुज स्ट्रेट पर आवाजाही ठप हो गई, जिससे कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित हुई और कीमतों में तेजी आई।
ब्रेंट क्रूड ने आज 2.22 डॉलर प्रति बैरल की बढ़त के साथ 96.97 डॉलर प्रति बैरल से कारोबार की शुरुआत की और थोड़ी देर में 97.89 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे यह 2.53 डॉलर प्रति बैरल यानी 2.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97.28 डॉलर प्रति बैरल पर था। इसी तरह, डब्ल्यूटीआई क्रूड ने 2.49 डॉलर प्रति बैरल की तेजी के साथ 96.90 डॉलर से कारोबार शुरू किया और 98.38 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। सुबह 10:30 बजे यह 3.31 डॉलर यानी 3.51 प्रतिशत उछलकर 97.72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
मार्केट विशेषज्ञों का कहना है कि सीजफायर की घोषणा के बावजूद हॉर्मुज स्ट्रेट बुधवार को ज्यादातर समय ब्लॉक रहा। अमेरिका और ईरान के तीखे बयानबाजी ने सीजफायर के भविष्य पर अनिश्चितता बढ़ा दी। इसके साथ ही, इजरायल के लेबनान हमले और ईरान के सऊदी अरब, कुवैत, बहरीन, यूएई और इजरायल में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल हमले ने स्थिति को और जटिल बना दिया।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि यदि सीजफायर विफल हुआ, तो पश्चिम एशिया में हालात गंभीर हो सकते हैं। अमेरिका पहले ही ईरान पर सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दे चुका है, जबकि ईरान भी लगातार कड़ा जवाब देने की धमकी दे रहा है। इस तनाव के कारण दुनिया भर में क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है।
हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की 20–30 प्रतिशत आपूर्ति रुक गई है। इसके अलावा, खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों से उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। सीजफायर के विफल होने की आशंका ने वैश्विक स्तर पर एनर्जी क्राइसिस का डर बढ़ा दिया है, जिसके कारण आज तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है।


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