नई दिल्ली, 08 अप्रैल।
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव कम होने और युद्धविराम की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का भाव 91.88 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गया, जबकि पश्चिम टेक्सास क्रूड 91.05 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड 109.27 डॉलर और पश्चिम टेक्सास क्रूड 112.95 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुए थे। सुबह नौ बजे भारतीय समयानुसार ब्रेंट क्रूड 13.47 प्रतिशत गिरकर 94.56 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था और पश्चिम टेक्सास क्रूड 15.20 प्रतिशत लुढ़ककर 95.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंचा।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के ऊर्जा और नागरिक ढांचे पर हमलों को दो सप्ताह के लिए रोकने की घोषणा की, जिसके बाद तेल की कीमतों में यह गिरावट देखी गई। उन्होंने कहा कि यह द्विपक्षीय युद्धविराम ईरान के हॉर्मुज जलसंधि को सुरक्षित रूप से खोलने पर निर्भर करेगा।
हॉर्मुज जलसंधि के जरिए दुनिया भर में तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा जाता है। पिछले युद्ध के दौरान यह मार्ग लगभग बंद हो गया था, जिससे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल आया। विशेष रूप से पश्चिम टेक्सास क्रूड की कीमत 70 प्रतिशत तक बढ़ गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि युद्धविराम के बावजूद तेल उत्पादन और ढांचे को पूरी तरह बहाल करने में समय लगेगा। बंद हुए तेल कुओं को शुरू करना, कर्मियों और जहाजों का पुनर्वितरण और रिफाइनरी की भंडार सामग्री को फिर से तैयार करना लंबी प्रक्रिया है। इसलिए फिलहाल तेल की गिरावट कुछ ही सत्रों तक स्थायी रहेगी और भविष्य में कीमत फिर 100 डॉलर के करीब पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की बढ़ी कीमत लंबे समय तक भारत के चालू खाते और राजकोषीय घाटे पर दबाव डाल सकती है। इसके अलावा, रुपये की कमजोरी, महंगाई में वृद्धि और विदेशी पूंजी की निकासी जैसी चुनौतियाँ भी बढ़ सकती हैं। इससे शेयर बाजार में अनिश्चितता बढ़ सकती है, क्योंकि सरकार को सब्सिडी, ब्याज दर और मुद्रा विनिमय दर पर कठोर निर्णय लेने पड़ सकते हैं।


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