हरिद्वार, 14 मई।
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद हलाला से जुड़े एक मामले में पुलिस ने जांच पूरी कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया है, जो राज्य में इस तरह का पहला मामला बताया जा रहा है। हालांकि इस प्रकरण में अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई है।
करीब दो माह पूर्व एक महिला ने अपने पति दानिश और ससुराल पक्ष के पांच अन्य लोगों के खिलाफ थाना बुग्गावाला में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विवाह के बाद उसे लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना दी गई और हलाला के लिए मजबूर किया गया, साथ ही तीन तलाक से जुड़े आरोप भी लगाए गए थे।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की थी। जांच के दौरान उत्तराखंड समान नागरिक संहिता 2024 (संशोधित 2026) के तहत कार्रवाई की गई, जिसमें हलाला जैसी प्रथाओं को प्रतिबंधित और दंडनीय माना गया है।
इसके अतिरिक्त भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 115(2) और 85, मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम 2019 की धारा 3 और 4 तथा दहेज प्रतिषेध अधिनियम 1961 की धारा 3 और 4 भी मामले में जोड़ी गई हैं।
जांच के दौरान पुलिस ने शिकायतकर्ता सहित संबंधित सभी पक्षों के बयान दर्ज किए। पूरी विवेचना उपनिरीक्षक मनोज कुमार द्वारा की गई और जांच पूर्ण होने के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की की अदालत में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
मामले में महिला के पति दानिश के साथ मोहम्मद अरशद, परवेज, जावेद और गुलशाना के नाम भी शामिल हैं। पुलिस के अनुसार जिन धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है उनमें गिरफ्तारी का प्रावधान नहीं है, इसलिए किसी भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया। आगे की कार्रवाई न्यायालय के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।
यह मामला उत्तराखंड में यूसीसी लागू होने के बाद हलाला से जुड़ा पहला प्रकरण माना जा रहा है, जिसे समान नागरिक संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है।







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