नई दिल्ली, 29।
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की ओर से बुधवार को जारी एक अध्ययन में कहा गया है कि आने वाले वर्षों में देश में असामान्य गर्म दिनों की संख्या तेजी से बढ़ सकती है और यह वृद्धि प्रति वर्ष लगभग 40 दिनों तक पहुंचने की संभावना है। इस अध्ययन को एआई आधारित जलवायु विश्लेषण प्रणाली के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसमें कई वर्षों के मौसम संबंधी आंकड़ों और भविष्य के अनुमान शामिल किए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार भारत में तापमान वृद्धि के साथ ही गर्म रातों और भारी बारिश की घटनाओं में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है, जिससे बिजली की खपत और शीतलन की मांग पर दबाव बढ़ेगा। कई शहरों और जिलों में लंबे समय तक उच्च तापमान बने रहने की आशंका जताई गई है, जिससे बुनियादी ढांचे और जनजीवन पर प्रभाव पड़ेगा।
अध्ययन में यह भी कहा गया है कि देश के कई डेटा सेंटर पहले से ही लंबे समय तक उच्च तापमान का सामना कर रहे हैं और आने वाले वर्षों में यह स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही गर्म रातों की संख्या में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है, जिससे ऊर्जा खपत और पीक लोड पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार मध्य और दक्षिण भारत के कई राज्यों में गर्म दिनों और भारी बारिश दोनों में वृद्धि की संभावना है, जिससे कृषि, स्वास्थ्य और शहरी व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। अध्ययन में यह भी चेतावनी दी गई है कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव अब भविष्य की नहीं बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बन चुके हैं और इससे निपटने के लिए प्रभावी रणनीति की आवश्यकता है।









.jpg)