नई दिल्ली, 16 मई।
दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने डमी फर्मों के माध्यम से चल रहे बड़े जीएसटी और वैट घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है। दोनों पर फर्जी कंपनियों और बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन कर धन की लेयरिंग करने का आरोप लगा है, जिससे असली लाभार्थियों की पहचान छिपाने की कोशिश की गई।
जांच में गिरफ्तार आरोपितों की पहचान राजीव कुमार परासर और चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता के रूप में हुई है। पुलिस का कहना है कि दोनों ने मिलकर फर्जी फर्मों और खातों के जरिए भारी वित्तीय लेनदेन को अंजाम दिया। इस पूरे मामले की जांच वर्ष 2020 में दर्ज एफआईआर के आधार पर आगे बढ़ी।
शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया था कि उनकी फर्म के जीएसटी और वैट दस्तावेजों का बिना अनुमति उपयोग कर लगभग 28.4 करोड़ रुपये के संदिग्ध व्यापारिक लेनदेन किए गए। फर्जी कंपनियों के नाम पर कई बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कर बाद में उसे नकद या अन्य खातों में भेजा जाता था, ताकि असली स्रोत छिपाया जा सके।
जांच एजेंसियों को किसी वास्तविक व्यापारिक गतिविधि के प्रमाण नहीं मिले, जिसके बाद यह सामने आया कि पूरा नेटवर्क डमी फर्मों के जरिए संचालित हो रहा था। बिचौलियों और फर्जी नामों पर कंपनियां बनाकर करोड़ों रुपये का घुमावदार लेनदेन किया जाता था।
चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता की भूमिका भी जांच में सामने आई, जिनकी फर्म के जरिए संदिग्ध कंपनियों के जीएसटी रिटर्न और अन्य वैधानिक कार्य पूरे किए जाते थे। कई मामलों में कर्मचारियों के निजी खातों से टैक्स और जुर्माना जमा कर बाद में वह राशि वापस लौटाई जाती थी।
पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से जांच से बचते रहे और लगातार स्थान बदलते रहे। तकनीकी निगरानी, बैंक रिकॉर्ड और जीएसटी दस्तावेजों के आधार पर 12 मई 2026 को दोनों को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया गया और विस्तृत पूछताछ जारी है।
जांच में यह भी सामने आया कि मुख्य आरोपी राजीव कुमार परासर मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ का निवासी है, जिसने दिल्ली में पढ़ाई और अकाउंटिंग क्षेत्र में कार्य शुरू किया था। वहीं अतुल गुप्ता चांदनी चौक स्थित एक पुरानी चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म से जुड़ा है, जिसके माध्यम से वह लंबे समय से पेशेवर गतिविधियां संचालित कर रहा था।
पुलिस ने आम लोगों और कारोबारियों से अपील की है कि वे अपने जीएसटी, पैन, आधार और डिजिटल दस्तावेजों के उपयोग को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित एजेंसियों को दें।










