राऊज एवेन्यू सेशंस कोर्ट में 1980 की मतदाता सूची में सोनिया गांधी का नाम कथित रूप से जुड़वाने के मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर आज होने वाली सुनवाई स्थगित कर दी गई, जिससे मामले की आगे की प्रक्रिया कुछ समय के लिए टल गई।
सुनवाई स्थगित होने का कारण सोनिया गांधी की ओर से पक्ष रखने वाले वकील का अनुपस्थित होना बताया गया है। इस पर स्पेशल जज विशाल गोगने ने मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई निर्धारित करने का आदेश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से शनिवार को निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत की गई। इससे पहले अदालत ने 18 अप्रैल को दोनों पक्षों को अपने-अपने लिखित तर्क दाखिल करने के निर्देश दिए थे, जिसके तहत याचिकाकर्ता की दलीलें उसी दिन पूरी कर ली गई थीं।
यह याचिका वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर की गई है, जिसमें मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग खारिज कर दी गई थी। इसके बाद सेशंस कोर्ट में इस आदेश को चुनौती दी गई और मामले में आगे की सुनवाई जारी है।
अदालत ने नौ दिसंबर 2025 को सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था। इससे पहले 11 सितंबर को एडिशनल चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट ने याचिका को खारिज कर दिया था।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1980 में सोनिया गांधी का नाम नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज किया गया था, जबकि वे उस समय भारत की नागरिक नहीं थीं। यह भी कहा गया है कि 1982 में उनका नाम सूची से हटाया गया और 1983 में फिर जोड़ा गया।
आगे याचिका में दावा किया गया है कि उन्होंने भारतीय नागरिकता के लिए अप्रैल 1983 में आवेदन किया था और उसी वर्ष नागरिकता मिलने के बाद 1980 में नाम जुड़ने के लिए फर्जी दस्तावेजों के उपयोग की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर इसे संज्ञेय अपराध बताते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। मजिस्ट्रेट अदालत ने पहले इस मामले में न तो सोनिया गांधी को और न ही दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था।




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