न्यायपालिका
16 May, 2026

पदस्थापन आदेश पर रोक, शिक्षकों को मिली अंतरिम राहत

जोधपुर में अधिकरण ने पदोन्नत व्याख्याताओं के पदस्थापन आदेश पर रोक लगाते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर शिक्षकों को अंतरिम राहत प्रदान की।

जोधपुर, 16 मई।

राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण, जोधपुर ने स्कूल व्याख्याताओं के पदोन्नति पदस्थापन से जुड़े मामलों पर सुनवाई करते हुए शिक्षा विभाग के 12 मई 2026 के पदस्थापन आदेश पर अंतरिम रोक लगाते हुए संबंधित अपीलों का अंतिम निस्तारण किया है।

यह मामला जोधपुर, सिरोही और बीकानेर जिलों के स्कूलों में कार्यरत व्याख्याताओं श्रवण कुमार, कान्ता शर्मा एवं पूर्णिमा पालीवाल से जुड़ा है, जिनका पदस्थापन आदेश के तहत प्रतापगढ़, बांसवाड़ा, उदयपुर एवं बालोतरा जैसे दूरस्थ जिलों में किया गया था, जिस पर अब रोक लग गई है।

उक्त अपीलार्थी पूर्व में अध्यापक ग्रेड द्वितीय के पद पर कार्यरत थे, जिन्हें वर्ष 2024-25 की रिक्तियों के आधार पर 18 अप्रैल 2026 को नियम 33 के तहत स्कूल व्याख्याता पद पर पदोन्नति दी गई थी। इसके बाद विभाग ने आदेश जारी कर उन्हें 20 अप्रैल 2024 से वर्तमान विद्यालय में ही कार्यग्रहण करने का निर्देश दिया था, जिसके अनुसार उन्होंने 21 एवं 22 अप्रैल 2026 को कार्यभार संभाल लिया था।

पदोन्नति के बाद विभाग ने काउंसलिंग प्रक्रिया के माध्यम से पदस्थापन की व्यवस्था की थी, जिसमें कर्मचारियों से विकल्प पत्र भरवाए गए थे ताकि उन्हें इच्छित स्थान पर तैनाती दी जा सके, लेकिन आरोप है कि इन विकल्पों के बावजूद कई कर्मचारियों को मनचाहे स्थान के बजाय अन्य जिलों में भेज दिया गया।

अपील में यह भी कहा गया कि काउंसलिंग की मूल भावना के विपरीत गृह जिलों के रिक्त पदों को सूची में शामिल ही नहीं किया गया और कुछ कर्मचारियों के सेवानिवृत्ति के निकट होने, गंभीर बीमारी से ग्रस्त होने तथा पति-पत्नी के एक ही जिले में कार्यरत होने जैसी परिस्थितियों को भी नजरअंदाज कर दूरस्थ जिलों में पदस्थापन कर दिया गया।

साथ ही यह भी आरोप सामने आया कि काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता का पालन नहीं किया गया और कुल रिक्त पदों से कम पद प्रदर्शित किए गए, जबकि नियमानुसार अधिक पद दिखाए जाने चाहिए थे, जिससे पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।

मामले में अपीलार्थियों ने अधिवक्ता के माध्यम से अधिकरण में याचिकाएं प्रस्तुत कीं, जिनमें कहा गया कि विभाग ने मनमाने ढंग से पदस्थापन किया है और विकल्प पत्रों के विपरीत निर्णय लेते हुए उन्हें दूरस्थ स्थानों पर भेजा गया है।

अधिकरण ने दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करते हुए आदेश दिया कि अपीलार्थी दो सप्ताह में सक्षम अधिकारी के समक्ष परिवेदना प्रस्तुत करें तथा विभाग चार सप्ताह में उस पर निर्णय दे। साथ ही अंतिम निर्णय तक 12 मई 2026 के पदस्थापन आदेश पर रोक लगाते हुए उन्हें वर्तमान पदस्थापन स्थल पर ही कार्यरत रहने का आदेश दिया गया है।

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