नई दिल्ली, 16 मई।
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में रॉबर्ट वाड्रा को जमानत दे दी है। विशेष न्यायाधीश सुशांत चंगोट्रा ने उन्हें 50 हजार रुपये के निजी मुचलके तथा उतनी ही राशि के जमानती मुचलके पर रिहा करने का निर्देश दिया।
अदालत में पेशी के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने कहा कि उन्हें न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास है और उनके पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि वे सभी सवालों का जवाब देने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने प्रवर्तन निदेशालय पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप लगाया और जांच का सामना करने की बात कही।
15 अप्रैल को अदालत ने उन्हें आरोपी के रूप में समन जारी करने का आदेश दिया था और वाड्रा सहित 11 आरोपियों को पेश होने के लिए कहा गया था। इनमें विभिन्न कंपनियां और अन्य व्यक्ति शामिल हैं, जिन पर मनी लॉन्ड्रिंग कानून की धाराओं के तहत आरोप तय किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान वाड्रा ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का कोई आधार नहीं बनता। उनके वकील ने भी ईडी की चार्जशीट पर संज्ञान लेने का विरोध किया था।
वाड्रा ने समन आदेश को उच्च न्यायालय में भी चुनौती दी थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली और ट्रायल कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया गया। पहले उन्हें 2 अगस्त 2025 को समन जारी हुआ था, जबकि 17 जुलाई 2025 को ईडी ने हरियाणा के शिकोहपुर भूमि से जुड़े मामले में चार्जशीट दाखिल की थी।
इस मामले में वाड्रा और उनकी कंपनी से जुड़े कई लोगों के नाम शामिल हैं और जांच एजेंसी ने 37.64 करोड़ रुपये की 43 संपत्तियों को जब्त किया है। मामला 2008 के भूमि सौदे से जुड़ा है, जिसमें जमीन की खरीद और बिक्री के बाद बड़े मुनाफे का आरोप लगाया गया है।




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