रांची, 15 मई
रांची में झारखंड सरकार के ग्रामीण विकास विभाग से जुड़े बहुचर्चित टेंडर घोटाले के मामले में आरोपी अधिशाषी अभियंता अजय कुमार ने शुक्रवार को पीएमएलए की विशेष अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण के बाद अदालत ने उन्हें शर्तों के साथ जमानत प्रदान कर दी।
विशेष अदालत ने अजय कुमार को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया तथा पासपोर्ट जमा करने और न्यायालय की अनुमति के बिना देश से बाहर न जाने की शर्त लगाई। अदालत ने जमानत स्वीकार करते हुए आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रखने के निर्देश दिए।
इस मामले में हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा प्रमोद कुमार सहित 14 अन्य आरोपियों के विरुद्ध पूरक आरोप पत्र दाखिल किया गया था। आरोप पत्र पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने सभी आरोपियों को समन जारी किया था, जिसके बाद कई आरोपियों ने आत्मसमर्पण किया और उन्हें जमानत भी मिल चुकी है।
अजय कुमार वर्तमान में ग्रामीण विकास विभाग में अधिशाषी अभियंता के पद पर कार्यरत हैं। इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर चर्चा लगातार बनी हुई है।
इस प्रकरण की शुरुआत वर्ष 2019 में हुई थी, जब जमशेदपुर के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। जांच में सामने आया कि ग्रामीण कार्य विभाग में टेंडर आवंटन के बदले कमीशन लेने का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसमें प्रत्येक टेंडर पर लगभग तीन प्रतिशत तक कमीशन वसूली का आरोप है और इसका वितरण तय व्यवस्था के अनुसार किया जाता था।
जांच एजेंसी की पड़ताल में यह भी सामने आया कि यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था और इसमें कई अधिकारियों तथा बिचौलियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई। एजेंसी अब तक झारखंड, बिहार और दिल्ली समेत 52 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है।
इस कार्रवाई के दौरान पूर्व मंत्री आलमगीर आलम, उनके निजी सचिव सहित अन्य सहयोगियों समेत नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जांच में अब तक लगभग 44 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है, करीब 38 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं तथा आठ लग्जरी वाहन भी जब्त किए गए हैं।
एजेंसी इस पूरे मामले में वित्तीय लेनदेन, अधिकारियों की भूमिका और कमीशन नेटवर्क के अन्य पहलुओं की गहन जांच में जुटी हुई है।




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