छत्तीसगढ़
15 May, 2026

वृंदावन कॉलोनी भूमि विवाद लोक अदालत में सुलझेगा, सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश

वृंदावन कॉलोनी के दशकों पुराने भूमि विवाद को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर विशेष लोक अदालत में निपटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है, जिसमें सैकड़ों परिवारों के भविष्य का फैसला होगा।

जगदलपुर, 15 मई।

वृंदावन कॉलोनी के लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद को लेकर अब समाधान की नई उम्मीद जगी है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह मामला विशेष लोक अदालत में सुनवाई के लिए भेजा गया है, जहां दोनों पक्षों के बीच सहमति से निपटारा किए जाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

करीब 60 एकड़ में फैली इस कॉलोनी को लेकर बस्तर राज परिवार और वहां रह रहे सैकड़ों परिवारों के बीच कई दशकों से मालिकाना हक को लेकर कानूनी संघर्ष जारी है। यह विवाद वर्षों से विभिन्न अदालतों में चलता रहा है और समय-समय पर अलग-अलग फैसलों के चलते स्थिति और जटिल होती गई।

जानकारी के अनुसार, 1980 के दशक में इस कॉलोनी में व्यवस्थित बसावट शुरू हुई थी और धीरे-धीरे पक्के मकानों का निर्माण भी होने लगा था। रहवासियों का कहना है कि उन्होंने लगभग 50 वर्ष पूर्व बस्तर राज परिवार से एनओसी लेकर जमीन खरीदी थी, जिसके आधार पर उन्होंने अपने घर बनाए और पूरी कॉलोनी विकसित की।

समय के साथ जमीन के वास्तविक स्वामित्व को लेकर विवाद गहराता गया और मामला निचली अदालत तक पहुंचा, जहां शुरुआती सुनवाई में फैसला रहवासियों के पक्ष में आया था। इस निर्णय से कॉलोनीवासियों को राहत मिली थी और वे लंबे समय तक अपने अधिकारों को लेकर आश्वस्त रहे।

बाद में इस फैसले को चुनौती दी गई और मामला हाईकोर्ट पहुंचा, जहां सुनवाई के दौरान रहवासियों या उनके पक्ष की अनुपस्थिति के कारण एकपक्षीय निर्णय बस्तर राज परिवार के पक्ष में आ गया। इस फैसले के बाद विवाद और बढ़ गया और राज परिवार का दावा कानूनी रूप से मजबूत माना जाने लगा। इसके बाद रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की संवेदनशीलता और सैकड़ों परिवारों के आवासीय हितों को देखते हुए निर्देश दिया कि इस विवाद का समाधान केवल कानूनी लड़ाई से नहीं बल्कि आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए। इसी के तहत मामला विशेष लोक अदालत में भेजते हुए इसे जगदलपुर जिला एवं सत्र न्यायालय को सौंप दिया गया है।

अदालत के निर्देशानुसार इस मामले की सुनवाई 21, 22 और 23 अगस्त 2026 को होगी, जिसमें दोनों पक्षों के बीच समझौते की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जिला न्यायालय द्वारा करीब 500 रहवासियों को नोटिस जारी कर उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे कॉलोनी में हलचल बढ़ गई है।

राज परिवार का पक्ष लगातार यही रहा है कि 60 एकड़ भूमि उनकी निजी संपत्ति है और उन पर उनका वैधानिक अधिकार है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद उनकी स्थिति मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब उन्हें भी समझौता प्रक्रिया में शामिल होना होगा।

सूत्रों के अनुसार, इस विवाद के समाधान के लिए भूमि नियमितीकरण, मुआवजा, लीज या अन्य वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है, ताकि वर्षों से बसे परिवारों का भविष्य सुरक्षित रहे और राज परिवार के अधिकारों का भी सम्मान हो सके। लगभग 46 वर्ष पुराने इस विवाद के समाधान की दिशा में अगस्त की विशेष लोक अदालत को निर्णायक माना जा रहा है।

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