भोपाल, 28 अप्रैल
प्रदेश में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों की नाराजगी अब बड़े आंदोलन का रूप लेने जा रही है। करीब 30 हजार कर्मचारियों ने 4 मई से चरणबद्ध तरीके से सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि बीते 5 से 6 महीनों से वेतन का भुगतान नहीं हुआ है, जिससे आर्थिक संकट लगातार बढ़ता जा रहा है।
कर्मचारियों ने सरकार के डिजिटल व्यवस्था संबंधी दावों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब डिजिटल प्रणाली का दावा किया जाता है, तो वेतन समय पर क्यों नहीं दिया जा रहा। मध्यप्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने स्पष्ट कहा है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन और अधिक तीव्र किया जाएगा।
कर्मचारी संगठनों ने इसे केवल प्रशासनिक देरी नहीं बल्कि सुनियोजित शोषण बताया है। उनका आरोप है कि आउटसोर्स कर्मचारियों को कम वेतन, अनियमित भुगतान और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है। एनपीएस, स्वास्थ्य बीमा, अवकाश और महंगाई भत्ता जैसी सुविधाओं का अभाव भी लंबे समय से बना हुआ है।
पिछले 5 वर्षों से भुगतान व्यवस्था अनियमित बनी हुई है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है। कई कर्मचारियों का कहना है कि महीनों से वेतन न मिलने के कारण घर का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है, बच्चों की पढ़ाई और फीस तक प्रभावित हो रही है। उनका सवाल है कि जब कर्मचारी ही मानसिक तनाव में रहेगा तो वह मरीजों की बेहतर सेवा कैसे कर पाएगा।
कर्मचारी संघ ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और इसकी जिम्मेदारी पूरी तरह सरकार पर होगी।











