नई दिल्ली, 08 मई।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री आगामी दस मई को देश में बाढ़ तथा लू की स्थिति से निपटने की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा हेतु एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इस बैठक में विभिन्न आपदा प्रबंधन व्यवस्थाओं की मौजूदा स्थिति पर गहन चर्चा की जाएगी।
बैठक में केंद्र सरकार की विभिन्न एजेंसियों की तैयारियों, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली की कार्यप्रणाली, संसाधनों की उपलब्धता एवं तैनाती तथा आपसी समन्वय की स्थिति का मूल्यांकन किया जाएगा। इसमें इस बात पर विशेष ध्यान रहेगा कि आपदाओं की स्थिति में जन-धन की हानि को न्यूनतम कैसे किया जाए।
सरकार की ओर से बताया गया है कि आपदा प्रबंधन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया गया है, जिसमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच बेहतर समन्वय के साथ-साथ सभी संबंधित एजेंसियों की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। इसके अंतर्गत आपदा के समय त्वरित प्रतिक्रिया और प्रभावी प्रबंधन पर बल दिया जा रहा है।
बैठक में बाढ़ नियंत्रण के लिए चल रही दीर्घकालिक योजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की जाएगी। इसमें नदियों के प्रबंधन, महत्वपूर्ण ढांचागत परियोजनाओं की सुरक्षा तथा वैज्ञानिक पूर्वानुमान प्रणाली में हुए सुधारों पर विचार किया जाएगा।
इसके साथ ही पिछले वर्ष की समीक्षा बैठक में लिए गए निर्णयों के क्रियान्वयन की स्थिति का भी आकलन किया जाएगा, ताकि विभिन्न योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके और जिम्मेदारी तय की जा सके।
बैठक में आधुनिक तकनीक आधारित बाढ़ पूर्वानुमान प्रणाली को और मजबूत बनाने, रीयल टाइम डेटा के उपयोग को बढ़ाने, एक साथ आने वाली बाढ़ और लू जैसी आपदाओं से निपटने की तैयारी को सुदृढ़ करने तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। राहत सामग्री, चिकित्सा व्यवस्था और आपातकालीन संसाधनों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया जाएगा।



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