ट्यूनिस, 07 मई
ट्यूनीशिया में एक चर्चित पत्रकार जियेद हेनी को न्यायपालिका की आलोचना करने के मामले में न्यायालय ने एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इस फैसले के बाद देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस की आजादी को लेकर बहस तेज हो गई है।
जियेद हेनी को पिछले महीने उस समय हिरासत में लिया गया था, जब उन्होंने एक लेख के माध्यम से न्यायपालिका के एक निर्णय की आलोचना की थी। उनके वकील ने अदालत के फैसले को कठोर बताते हुए कहा कि यह देश में स्वतंत्र अभिव्यक्ति पर बढ़ती पाबंदियों को और मजबूत करता है।
सजा सुनाए जाने से एक दिन पहले हेनी ने जेल से अपने परिवार के माध्यम से एक पत्र जारी किया था। इसमें उन्होंने कहा कि वह इस मामले में किसी भी निर्णय के खिलाफ अपील नहीं करेंगे, क्योंकि वह इस मुकदमे को वैध नहीं मानते। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों और पत्रकार संगठनों का कहना है कि राष्ट्रपति कैस सईद के सत्ता केंद्रीकरण के बाद देश में स्वतंत्र आवाजों पर दबाव लगातार बढ़ा है। वर्ष 2021 में राष्ट्रपति ने निर्वाचित संसद को भंग कर दिया था और बाद में अध्यादेशों के जरिए शासन शुरू किया गया। इसके बाद 2022 में सुप्रीम न्यायिक परिषद को भी भंग कर कई न्यायाधीशों को पद से हटा दिया गया था, जिससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठे।
विपक्षी दलों का आरोप है कि इन कदमों से न्यायपालिका की स्वतंत्रता कमजोर हुई है। हालांकि राष्ट्रपति सईद इन आरोपों को खारिज करते हुए कहते रहे हैं कि न्यायपालिका में फैले भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की गई है और देश में स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित है।
उल्लेखनीय है कि 2011 में ट्यूनीशिया में हुए जनआंदोलन के बाद अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता में व्यापक विस्तार हुआ था, जिसने अरब क्षेत्र में बड़े बदलाव की शुरुआत की थी। लेकिन हाल के वर्षों में पत्रकारों, विपक्षी नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कारोबारियों की गिरफ्तारियों ने लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।






.jpg)

.jpg)

