कोलकाता, 14 मई।
पश्चिम बंगाल में सामने आए विभिन्न भर्ती घोटालों के मामलों में अब संबंधित अधिकारियों और नौकरशाहों की जांच का मार्ग प्रशस्त हो गया है। राज्य सरकार ने बुधवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो को इन मामलों से जुड़े अधिकारियों के खिलाफ जांच आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी।
राज्य सरकार के अनुसार पूर्ववर्ती प्रशासन द्वारा ऐसे मामलों में अधिकारियों के विरुद्ध जांच की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके चलते गंभीर भ्रष्टाचार आरोपों के बावजूद केंद्रीय एजेंसी कई जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई आगे नहीं बढ़ा पा रही थी। अब सरकार की ओर से आवश्यक मंजूरी दिए जाने के बाद जांच प्रक्रिया को गति मिलने की संभावना है।
जानकारी के अनुसार शिक्षक एवं शिक्षाकर्मी भर्ती अनियमितता, नगर निकायों में भर्ती से जुड़े विवाद तथा सहकारी संस्थाओं में वित्तीय अनियमितताओं जैसे मामलों में न्यायालय के निर्देशों के तहत पहले से ही जांच चल रही है। अब इन मामलों में शामिल अधिकारियों एवं प्रशासनिक कर्मियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच संभव होगी।
उल्लेखनीय है कि शिक्षक भर्ती अनियमितताओं को लेकर राज्य में पिछले कई वर्षों से विवाद बना हुआ है। इस प्रकरण में लगभग 26 हजार शिक्षकों और शिक्षाकर्मियों की नियुक्तियां रद्द की जा चुकी हैं, जबकि पूर्व शिक्षा मंत्री सहित कई लोग पहले ही गिरफ्तारी का सामना कर चुके हैं।
राज्य सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए “जीरो टॉलरेंस” की नीति पर काम किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि जनता के विश्वास के अनुरूप पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करते हुए जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।












