राजधानी भोपाल में मूक-बधिर और श्रवण बाधित लोगों को न्याय प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में अहम पहल की गई है। महिला पुलिस थाने में देश के पहले “संकेत-संवाद मध्यस्थता केन्द्र” की शुरुआत की गई, जहां साइन लैंग्वेज की मदद से विवादों के समाधान की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।
इस विशेष केन्द्र का ई-लोकार्पण शुक्रवार को जबलपुर से भारत के मुख्य न्यायाधिपति न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया। यह देश का पहला ऐसा मध्यस्थता केन्द्र बताया जा रहा है, जहां मूक-बधिर और श्रवण बाधित व्यक्तियों के मामलों का निपटारा प्रशिक्षित मध्यस्थों और साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर की सहायता से किया जाएगा।
भोपाल के साथ-साथ जबलपुर, इंदौर, रीवा और सीधी में भी ऐसे केन्द्र शुरू किए गए हैं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय विधि मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, न्यायपालिका के वरिष्ठ अधिकारी और कई न्यायाधीश मौजूद रहे। भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में जिला न्यायाधीश, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी, पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में मूक-बधिर लोग शामिल हुए।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अनुसार, अब तक सामान्य मध्यस्थों के माध्यम से प्रक्रिया पूरी की जाती थी, जिससे दिव्यांगजनों को कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। इसी को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त मध्यस्थों और साइन लैंग्वेज विशेषज्ञों की व्यवस्था की गई है।
कार्यक्रम के दौरान एक पारिवारिक विवाद के मामले में विशेषज्ञों की सहायता से सुलह-समझौते की प्रक्रिया भी कराई गई। अधिकारियों का मानना है कि यह पहल दिव्यांगजनों को सुलभ, सम्मानजनक और प्रभावी न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।










