चेन्नई, 08 मई
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी तमिलगा वेत्रि कझगम को सरकार गठन का निमंत्रण न मिलने पर कांग्रेस पार्टी ने राज्यपाल के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि राज्यपाल संवैधानिक परंपराओं की अनदेखी करते हुए केंद्र सरकार के दबाव में कार्य कर रहे हैं।
कांग्रेस ने शुक्रवार को राज्य के विभिन्न जिला मुख्यालयों में व्यापक विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए। पार्टी का कहना है कि हाल ही में हुए चुनाव में सबसे अधिक सीटें हासिल करने वाली तमिलगा वेत्रि कझगम को सरकार बनाने से वंचित करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ है और इसके पीछे केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार का प्रभाव है।
कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे केंद्र के प्रभाव में कार्य कर रहे हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर किया जा रहा है। पार्टी ने यह भी मांग की कि तमिलगा वेत्रि कझगम के प्रमुख विजय को तुरंत सरकार गठन के लिए आमंत्रित किया जाए।
उल्लेखनीय है कि हाल के विधानसभा चुनाव में तमिलगा वेत्रि कझगम ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत की है। इसके बाद विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा भी प्रस्तुत किया था, लेकिन स्पष्ट बहुमत न होने के कारण अब तक कोई औपचारिक आमंत्रण नहीं दिया गया है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि विजय ने राज्यपाल से दो बार मुलाकात की, फिर भी कोई सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया। इस मुद्दे पर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम, विदुथलाई चिरुथैगल काची और वामपंथी दलों सहित कई राजनीतिक दलों ने भी राज्यपाल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
इसी बीच कांग्रेस ने तमिलगा वेत्रि कझगम के साथ गठबंधन के बाद राज्यव्यापी आंदोलन तेज कर दिया है। चेन्नई में अन्ना सालै पर हुए प्रदर्शन का नेतृत्व तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सबसे बड़ी पार्टी को सरकार गठन का अवसर तुरंत दिया जाए।






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