कोलकाता, 14 मई।
पश्चिम बंगाल में जमीन कब्जा और रंगदारी से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में कोलकाता पुलिस के उपायुक्त शांतनु सिन्हा बिस्वास गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय के समक्ष पेश हुए, जिससे मामले में नई प्रगति सामने आई है।
ईडी के एक अधिकारी ने इस पेशी की पुष्टि करते हुए बताया कि शांतनु सिन्हा बिस्वास पहले कालीघाट थाना प्रभारी रह चुके हैं और उन्हें राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री का करीबी माना जाता रहा है।
एजेंसी की ओर से उन्हें इससे पहले भी कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए थे। हाल ही में जारी नए समन के बावजूद भी उनके पेश न होने पर ईडी ने उनके ठिकाने की जानकारी के लिए सुरक्षा निदेशालय को पत्र भेजा था।
ईडी के अनुसार, उन्हें 28 अप्रैल को भी पेश होने के लिए कहा गया था, जो राज्य विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से एक दिन पहले की तारीख थी, लेकिन उस समय भी वह उपस्थित नहीं हुए थे।
इसके बाद उनके विदेश जाने की आशंका को देखते हुए जांच एजेंसी ने उनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी कर दिया था, जिसे हवाई अड्डों और सीमा सुरक्षा एजेंसियों तक भेजा गया था।
जांच के दौरान गोलपार्क क्षेत्र के कारोबारी ‘सोना पप्पू’ से जुड़े जमीन कब्जा और रंगदारी के मामलों में उनके नाम का उल्लेख सामने आया है। साथ ही बेहाला के कारोबारी जॉय कामदार की वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामले की जांच में भी उनके संबंधों को लेकर कुछ अतिरिक्त जानकारियां मिली हैं, जिसके बाद एजेंसी उनसे लंबे समय से पूछताछ की कोशिश कर रही थी।







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