काठमांडू, 14 मई।
नेपाल में संपत्ति जांच आयोग ने अपने दायरे में आने वाले सभी सार्वजनिक पदाधिकारियों को एक महीने के भीतर अपनी संपत्ति का विस्तृत विवरण जमा करने का निर्देश जारी किया है। इस आदेश के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
आयोग की ओर से गुरुवार को जारी सूचना में कहा गया है कि संबंधित अधिकारियों को स्वयं के साथ-साथ अपने परिवार के सदस्यों की संपत्ति तथा नेपाल और विदेश में मौजूद सभी परिसंपत्तियों का पूरा ब्योरा प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। यह प्रक्रिया वर्ष 2006 से सार्वजनिक पदों पर रहे अधिकारियों से शुरू की जा रही है।
निर्देश के अनुसार वर्तमान प्रधानमंत्री से लेकर पूर्व प्रधानमंत्री और उपप्रधानमंत्री तक, सभी मौजूदा एवं पूर्व मंत्री, राज्य मंत्री और सहायक मंत्री को अपनी संपत्ति का विवरण देना होगा। इसके साथ ही वर्तमान और पूर्व सांसदों तथा संविधान सभा के सदस्यों को भी इसमें शामिल किया गया है।
आयोग ने आगे स्पष्ट किया है कि संवैधानिक निकायों के सभी वर्तमान और पूर्व पदाधिकारी, पूर्व प्रधान न्यायाधीश तथा सभी पूर्व न्यायाधीश भी इस दायरे में आएंगे। इसके अलावा सेना के सेवानिवृत्त कर्नल और उससे ऊपर के सभी पूर्व अधिकारी भी संपत्ति विवरण देने के लिए बाध्य होंगे।
प्रदेश स्तर पर प्रदेश प्रमुख, मुख्यमंत्री, मंत्री और सहायक मंत्री सहित सभी पूर्व पदाधिकारी तथा प्रदेश सभा के सदस्य भी इस निर्देश के तहत विवरण प्रस्तुत करेंगे। महान्यायाधिवक्ता और मुख्य न्यायाधिवक्ता सहित उनके सेवानिवृत्त अधिकारी भी इसमें शामिल हैं।
स्थानीय स्तर पर पुराने जिला विकास समिति और वर्तमान जिला समन्वय समिति के सभी पदाधिकारी भी संपत्ति विवरण देंगे। साथ ही स्थानीय तह के प्रमुख और उपप्रमुख तथा उनके पूर्व पदाधिकारी भी इस प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।
इसके अलावा नेपाल के दूतावासों और विदेश स्थित कूटनीतिक मिशनों के प्रमुख एवं कर्मचारी, सहसचिव स्तर के सरकारी अधिकारी, संसद, स्वास्थ्य और मानवाधिकार सेवाओं से जुड़े सभी कर्मचारी भी इस दायरे में आएंगे।
नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी और राष्ट्रीय अनुसंधान विभाग के पुलिस अधीक्षक एवं उससे ऊपर के सभी अधिकारी, यदि वे कार्यालय प्रमुख रहे हों तो उपसचिव स्तर के अधिकारी भी शामिल होंगे। नेपाल राष्ट्र बैंक के गवर्नर से लेकर सहसचिव स्तर तक के सभी कर्मचारी तथा सरकारी बैंक और वित्तीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी विवरण देंगे।
सार्वजनिक संस्थानों के बोर्ड के पदाधिकारी, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों के उच्च अधिकारी, प्रधानमंत्री से लेकर संवैधानिक निकायों के सलाहकार और सचिवालय के कर्मचारी भी इस निर्देश के तहत संपत्ति विवरण जमा करने के लिए बाध्य होंगे।













