पटना, 08 मई।
बिहार में निवेश को बढ़ावा देने और व्यापार सुधारों को गति देने के उद्देश्य से ‘डीरेगुलेशन 2.0’ को मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसको लेकर शुक्रवार को मुख्य सचिवालय के सभाकक्ष में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी संयुक्त अध्यक्षता केंद्र सरकार के कैबिनेट सचिवालय के विशेष सचिव केके पाठक और बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की।
बैठक में राज्य में निवेश को आकर्षित करने, व्यापार को आसान बनाने तथा पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को समाप्त करने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान ‘डीरेगुलेशन 1.0 और 2.0’ के तहत चल रहे सुधार कार्यों की भी समीक्षा की गई।
विशेष सचिव केके पाठक ने सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में अनावश्यक अनुपालन भार को कम करें और ‘डीरेगुलेशन 2.0’ के तहत चिन्हित सुधारों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूरा करें। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विभाग ऐसे नियम, रजिस्टर और प्रक्रियाओं की पहचान करे जिन्हें समाप्त किया जा सकता है, क्योंकि अनावश्यक प्रावधान निवेश और उद्योग विकास में बाधा उत्पन्न करते हैं।
बैठक में भवन निर्माण से जुड़े नियमों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल बिल्डिंग कोड ऑन सस्टेनेबिलिटी 2026 के मानकों को राज्य के भवन उपनियमों में शामिल करने पर भी चर्चा हुई। साथ ही शहरी नियोजन को अधिक प्रभावी बनाने के लिए फ्लोर एरिया रेशियो नियमों को तर्कसंगत बनाने और सरकारी संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के लिए टोटल फैसिलिटी मैनेजमेंट मॉडल अपनाने के निर्देश दिए गए।
केके पाठक ने यह भी कहा कि व्यावसायिक कानूनों में छोटे तकनीकी उल्लंघनों पर कारावास की बजाय आर्थिक दंड की व्यवस्था की दिशा में तेजी लाई जाए। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि यदि कोई सुधार एक से अधिक विभागों से जुड़ा हो तो कैबिनेट सचिवालय समन्वय की भूमिका निभाए, ताकि प्रक्रियाएं समय पर पूरी हों।
उन्होंने निर्देश दिया कि सभी विभाग अगले 15 कार्य दिवसों के भीतर ‘डीरेगुलेशन 2.0’ से जुड़े लंबित कार्यों को पूरा कर पोर्टल पर अपलोड करें। साथ ही प्रत्येक विभागीय नोडल अधिकारी को हर शुक्रवार प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया गया।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने बैठक में कहा कि सभी स्वीकृतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम और स्व-प्रमाणीकरण व्यवस्था को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए, ताकि पारदर्शिता बढ़े और प्रक्रियाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम हो। उन्होंने सभी विभागों को मिशन मोड में कार्य करने का निर्देश दिया।
बैठक में वित्त, उद्योग, नगर विकास, भवन निर्माण सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।






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