सरकार व नीतियाँ
09 Apr, 2026

अनुसंधान में निजी भागीदारी बढ़ाने पर जोर, उद्योग की भूमिका अहम

नई दिल्ली में डॉ. जितेंद्र सिंह ने अनुसंधान एवं विकास को मजबूत करने के लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर बल दिया।

नई दिल्ली, 09 अप्रैल।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने निजी क्षेत्र से अनुसंधान और विकास गतिविधियों में अपनी भूमिका को और अधिक सक्रिय करने का आग्रह किया है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि देश की नवाचार क्षमता को मजबूत बनाने के लिए उद्योग जगत की भागीदारी बेहद जरूरी है।

नीति आयोग की दो महत्वपूर्ण रिपोर्ट जारी करते हुए उन्होंने बताया कि सरकार ने अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। इसके साथ ही अनुसंधान, विकास और नवाचार को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से विशेष फंड व्यवस्था भी लागू की गई है, ताकि निजी क्षेत्र निवेश के लिए आगे आए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि अब प्राथमिकता केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन पर ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को वास्तविक समस्याओं की समझ विकसित करनी होगी, तभी सार्थक सुधार संभव हो पाएंगे।

उन्होंने यह भी कहा कि देश में वैज्ञानिक प्रतिभा की कोई कमी नहीं है, लेकिन जटिल प्रक्रियाएं और संस्थागत बाधाएं शोध के परिणामों को प्रभावित करती हैं। ऐसे में फंडिंग तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने, प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने और परोपकारी सहयोग को बढ़ावा देने की जरूरत है।

डॉ. सिंह ने कहा कि मजबूत शोध पारिस्थितिकी तंत्र के लिए केवल सरकार ही नहीं, बल्कि उद्योग, शैक्षणिक संस्थान और समाज के सभी वर्गों की संयुक्त भागीदारी जरूरी है, ताकि अनुसंधान को व्यावहारिक उत्पादों और समाधान में बदला जा सके।

रिपोर्ट जारी होने के मौके पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी ने कहा कि अनुसंधान प्रक्रियाओं को सरल बनाना वैज्ञानिक समुदाय की लंबे समय से चली आ रही मांग रही है। उन्होंने प्रणाली में बेहतर समन्वय और दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया।

नीति आयोग के सदस्य वी. के. सारस्वत ने कहा कि देश का अनुसंधान ढांचा बदलाव के दौर में है, लेकिन फंडिंग में देरी और प्रशासनिक अड़चनें अभी भी प्रमुख चुनौतियां बनी हुई हैं।

प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. ए. के. सूद ने कहा कि शोध को सहज और प्रभावी बनाने के प्रयास लगातार जारी रहने चाहिए, क्योंकि मौजूदा व्यवस्था में अभी भी कई कमियां मौजूद हैं।

रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि अनुसंधान तंत्र में अधिक लचीलापन, पारदर्शिता और पूर्वानुमेयता लाई जानी चाहिए, ताकि वैज्ञानिक बिना किसी बाधा के अपने कार्य को आगे बढ़ा सकें।

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