नई दिल्ली, 16 अप्रैल
हथकरघा विकास आयुक्त कार्यालय ने भारतीय वस्त्र परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पहली बार फेमिना मिस इंडिया के साथ साझेदारी की है। इस सहयोग का उद्देश्य समृद्ध भारतीय हथकरघा क्षेत्र और उसकी विविध सांस्कृतिक विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करना है।
“विश्व सूत्र – विश्व के लिए भारत की बुनाई” नामक विशेष पहल के अंतर्गत फेमिना मिस इंडिया के ग्रैंड फिनाले में एक विशेष हथकरघा संग्रह का प्रदर्शन किया जाएगा। इस संग्रह में भारतीय बुनकरों की कलात्मक दक्षता के साथ-साथ हथकरघा उद्योग की सांस्कृतिक गहराई और पर्यावरणीय संवेदनशीलता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
इस पहल की विशेषता यह है कि इसमें विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधि प्रतिभागी शामिल होंगे, जो अपने-अपने क्षेत्रों की पारंपरिक बुनाई शैलियों से प्रेरित परिधानों को प्रस्तुत करेंगे। ये परिधान चयनित देशों की सांस्कृतिक सौंदर्य दृष्टि को भी रचनात्मक रूप में दर्शाएंगे, जिससे भारत की वस्त्र परंपरा को वैश्विक फैशन से जोड़ने का प्रयास होगा।
देश की प्रमुख हथकरघा परंपराओं में वाराणसी ब्रोकेड, लेप्चा, कांचीपुरम, कोटा डोरिया, माहेश्वरी, पटोला, इकत, कसावु, पैठानी, फुलकारी, जामदानी, कुल्लू शॉल, उप्पादा, खुन्न, पश्मीना, मूगा सिल्क और इलकल जैसी समृद्ध परंपराएं शामिल हैं।
हथकरघा विकास आयुक्त ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य युवाओं, फैशन उद्योग से जुड़े हितधारकों और वैश्विक उपभोक्ताओं के बीच भारतीय हथकरघा की पहुंच और आकर्षण को बढ़ाना है, जिससे इसे केवल विरासत नहीं बल्कि भविष्य के रूप में स्थापित किया जा सके।
भारत विश्व की सबसे बड़ी हथकरघा परंपराओं में से एक है, जो कृषि के बाद सबसे अधिक लगभग 35 लाख बुनकरों और श्रमिकों को रोजगार प्रदान करता है। पर्यावरण अनुकूल उत्पादों की बढ़ती मांग के चलते घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार में हथकरघा वस्त्रों की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
यह पहल सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदला जा रहा है और “लोकल से ग्लोबल” तथा 5एफ मॉडल के माध्यम से वस्त्र उद्योग को नई दिशा दी जा रही है।





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