सूरत, 01 मई
सूरत में आयोजित दो दिवसीय वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय सम्मेलन में गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने कहा कि छोटे व्यापारियों और निवेशकों के हितों को केंद्र में रखते हुए इस क्षेत्रीय शिखर सम्मेलन की शुरुआत की गई है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2003 में प्रारंभ किया गया वाइब्रेंट गुजरात आज एक विशाल वैश्विक मंच का स्वरूप ले चुका है। शुरुआत में मात्र 76 सहमति पत्रों से आरंभ हुई इस पहल में वर्ष 2010 तक 41 हजार से अधिक सहमति पत्र हुए, जिनकी कुल राशि 26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है।
उप मुख्यमंत्री संघवी ने गुजरात की आर्थिक प्रगति के आंकड़े साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2003 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद मात्र 1.19 लाख करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2012-13 में बढ़कर 7.20 लाख करोड़ और अब 27 लाख करोड़ रुपये को पार कर चुका है। देश की कुल जनसंख्या का केवल छह प्रतिशत और भू-भाग का पांच प्रतिशत हिस्सा रखने के बावजूद गुजरात राष्ट्रीय सकल घरेलू उत्पाद में आठ प्रतिशत का योगदान दे रहा है।
उप मुख्यमंत्री ने बताया कि व्यापारिक क्षेत्र में गुजरात का देश में 27 प्रतिशत तथा माल ढुलाई में 40 प्रतिशत योगदान है। विनिर्माण क्षेत्र में भी राज्य की प्रगति अन्य राज्यों की तुलना में दोगुनी रही है। राज्य सरकार उद्योगों और निवेशकों के लिए सहायक भूमिका निभाते हुए प्रक्रियाओं को सरल बनाने में जुटी है। वर्ष 2024-25 में पांच हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रोत्साहन वितरित किया गया, जबकि चालू वर्ष में यह राशि सात हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
संघवी ने बताया कि राज्य सरकार पारंपरिक उद्योगों के साथ-साथ आंकड़ा केंद्र और विमानन जैसे नवीन क्षेत्रों में भी नए अवसर विकसित कर रही है। दक्षिण गुजरात वर्तमान में राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में 25 प्रतिशत योगदान दे रहा है और इस हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए विशेष आर्थिक क्षेत्र की योजना पर कार्य प्रारंभ किया जा चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि सूरत अब केवल हीरे और वस्त्र उद्योग तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश के लगभग 60 प्रतिशत सौर पैनलों का निर्माण अब यहीं हो रहा है। डांग, तापी और नवसारी जैसे क्षेत्रों से उद्योगों को डेढ़ घंटे में बंदरगाह तक पहुंचने की सुविधा मिल रही है, जिससे परिवहन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है।









