नई दिल्ली, 21 मई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हमारी मातृभूमि केवल साधना और उपासना की भूमि ही नहीं, बल्कि साहस, शक्ति और समस्त लोककल्याण की पावन धरा रही है। उन्होंने कामना व्यक्त की कि भारत की महान सांस्कृतिक विरासत और प्राचीन सभ्यता सदैव सभी के जीवन में सुख और समृद्धि का संचार करती रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक संस्कृत सुभाषित साझा किया, जिसमें मातृभूमि की महिमा और उसके दिव्य स्वरूप का वर्णन किया गया है।
इस सुभाषित में कहा गया है कि जिस पवित्र भूमि पर हमारे पूर्वजों ने महान कार्य किए, जहां देवताओं ने असुरों पर विजय प्राप्त की, और जो भूमि समस्त जीव-जंतुओं का आश्रय है, वह पृथ्वी मानव जीवन को ऐश्वर्य, सौभाग्य, तेज और समृद्धि प्रदान करे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सुभाषित हमारी मातृभूमि की दिव्यता, गौरव और समृद्ध परंपरा का परिचायक है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह भूमि केवल आध्यात्मिक साधना का केंद्र नहीं रही, बल्कि यह पराक्रम, शक्ति और जनकल्याण की भी आधारभूमि रही है।






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