फर्रुखाबाद, 25 मई।
गंगा दशहरा के पावन पर्व पर सोमवार को जनपद के विभिन्न गंगा तटों पर आस्था का महासंगम देखने को मिला। महाभारतकालीन पांचाल घाट पर तड़के से ही श्रद्धालुओं का तांता लग गया, जहां हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने गंगा में पवित्र स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। भीड़ के कारण मुख्य मार्गों पर यातायात का भारी दबाव रहा, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त प्रयास करने पड़े।
सुरक्षा के दृष्टिगत जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने स्वयं घाटों का भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। पांचाल घाट पर सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे, जिसमें बैरिकेडिंग के साथ पीएसी के कुशल तैराक और भारी पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की गई थी। पांचाल घाट से लेकर श्रंगीरामपुर तक सुरक्षा व्यवस्था के लिए सेक्टर एवं जोनल मजिस्ट्रेटों को तैनात किया गया था।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आज के दिन गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, जिसके चलते श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा। पांचाल घाट का अपना ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। स्थानीय संतों का मानना है कि महाभारत काल में द्रौपदी द्वारा इस स्थान पर दान-पुण्य और गंगा स्नान किया जाता था, जिसके कारण इसे पांचाल घाट के नाम से जाना जाता है। दुर्वासा ऋषि की तपोस्थली होने के कारण यहाँ का आध्यात्मिक वातावरण अत्यंत पावन माना जाता है। संतों के साधना स्थल होने के कारण इसे घटिया घाट के रूप में भी जाना जाता है।
इसी प्रकार, श्रंगीरामपुर का भी विशेष शास्त्रोक्त महत्व है। माना जाता है कि राजा दशरथ के बहनोई श्रंगी ऋषि ने यहीं अखंड साधना की थी, जिसके कारण इस घाट का नाम श्रंगीरामपुर पड़ा। आज के दिन राज्य भर से संत-महात्माओं और भक्तों ने यहां पहुंचकर गंगा स्नान किया। जिला प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुरक्षा हेतु भोर से ही विशेष निगरानी रखी गई और घाटों पर श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए व्यापक इंतजाम किए गए थे।







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