नई दिल्ली, 26 मई ।
राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभयारण्य क्षेत्र में अवैध रेत खनन और बिना पंजीकृत वाहनों से हो रही ढुलाई के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने एक मीडिया रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लेते हुए राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या इस रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई की गई है या नहीं। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मुरैना जिले में पूर्व आदेशों के बावजूद अवैध रेत खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लग पाई है और बिना पंजीकरण वाले वाहनों से खुलेआम रेत का परिवहन जारी है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि रिपोर्ट में किए गए दावे सही पाए जाते हैं तो यह अत्यंत गंभीर विषय होगा और इससे राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामों पर भी प्रश्न उठ सकते हैं।
न्यायालय ने मध्य प्रदेश सरकार को इस मामले में विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने और ताजा हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सत्य है तो यह चिंता का विषय है और इसकी गहन जांच आवश्यक है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र में अवैध गतिविधियां पर्यावरण और पारिस्थितिकी के लिए गंभीर खतरा उत्पन्न करती हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि यदि आवश्यक हुआ तो वह इस मामले में आगे और सख्त आदेश जारी कर सकता है ताकि अवैध खनन पर प्रभावी रोक सुनिश्चित की जा सके।















