नई दिल्ली, 26 मई ।
सीबीएसई की नई ऑन-स्क्रीन मार्किंग आधारित डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच कांग्रेस महासचिव एवं लोक लेखा समिति के अध्यक्ष के. सी. वेणुगोपाल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर गंभीर गड़बड़ियों की ओर ध्यान आकर्षित किया है।
उन्होंने आरोप लगाया है कि इस नई डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था में भारी खामियों के कारण देश और खाड़ी देशों में अध्ययनरत लाखों विद्यार्थियों के भविष्य और मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
पत्र में वेणुगोपाल ने कहा कि डिजिटल स्कैनिंग और ऑन-स्क्रीन मूल्यांकन प्रक्रिया में व्यापक त्रुटियां सामने आई हैं, जिसके चलते कई विद्यार्थियों ने अपने अंकों में विसंगतियों की शिकायत की है। उन्होंने दावा किया कि अनेक मामलों में सही उत्तर होने के बावजूद विद्यार्थियों को शून्य अंक प्रदान किए गए हैं।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि पुनर्मूल्यांकन के लिए उपलब्ध स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं धुंधली, कटी हुई या अपठनीय होने के कारण छात्र अपने अंकों का सत्यापन नहीं कर पा रहे हैं।
एक गंभीर उदाहरण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एक विद्यार्थी की भौतिकी उत्तर पुस्तिका में लिखावट किसी और की प्रतीत हुई, जिससे उत्तर पुस्तिकाओं के अदला-बदली की आशंका भी सामने आई है। साथ ही प्रश्न पत्रों के विभिन्न सेटों के कठिनाई स्तर में असमानता के कारण छात्रों को नुकसान होने की बात भी कही गई है, जिसके चलते ग्रेस अंक देने की मांग उठ रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि परिणाम जारी होने के बाद सत्यापन पोर्टल पर अत्यधिक दबाव के चलते प्रणाली पूरी तरह से बाधित हो गई और विद्यार्थियों को पुनर्मूल्यांकन के लिए भारी शुल्क का सामना करना पड़ा, जो हजारों से लेकर साठ हजार रुपये से अधिक तक बताया गया है।
वेणुगोपाल ने कहा कि शिक्षा मंत्रालय द्वारा तकनीकी सुधार के लिए विशेषज्ञ संस्थानों को शामिल करने की घोषणा केवल पोर्टल स्तर की समस्या तक सीमित है, जबकि असली समस्या डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की संरचनात्मक खामियों से जुड़ी है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि समयबद्ध समाधान सुनिश्चित किया जाए ताकि कोई भी विद्यार्थी उच्च शिक्षा के अवसरों से वंचित न रह जाए।




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