नई दिल्ली, 29 मई।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को संस्कृत का एक सुभाषित साझा करते हुए विनम्रता, क्षमाशीलता और श्रेष्ठ आचरण के महत्व को रेखांकित किया और कहा कि यही गुण व्यक्ति के वास्तविक आभूषण हैं तथा इन्हीं मूल्यों के आधार पर देश विकसित भारत के संकल्प की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर अपने संदेश में कहा कि विनम्रता, क्षमा और उत्तम आचरण ही व्यक्तित्व को वास्तविक अर्थों में परिभाषित करते हैं और इन्हीं गुणों के साथ देशवासी विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने में निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने इस अवसर पर संस्कृत श्लोक भी साझा किया।
“तेजः क्षमा धृतिः शौचमद्रोहो नातिमानिता।भवन्ति सम्पदं दैवीमभिजातस्य भारत।।"
प्रधानमंत्री ने इस सुभाषित के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि तेज, क्षमा, दृढ़ धैर्य, पवित्र आचरण, राष्ट्र के प्रति समर्पण और अहंकार रहित विनम्रता जैसे गुण दैवीय प्रवृत्ति वाले व्यक्तित्व की पहचान होते हैं।











