देहरादून, 02 जून।
उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार राज्य के पूर्व सैनिकों और पूर्व अर्ध-सैनिकों के कल्याण के लिए एक व्यापक कार्ययोजना पर काम कर रही है। इस कड़ी में सरकार अब पूर्व सैनिकों के लिए नई शस्त्र लाइसेंस नीति लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। गृह विभाग स्तर पर इस संबंध में विमर्श का दौर जारी है। इसके साथ ही, पूर्व सैनिकों से संबंधित बढ़ते जमीनी विवादों को हल करने और उन्हें निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में भी सरकार विशेष रणनीति बना रही है।
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल (रि.) अजय कोठियाल ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ इस विषय पर कई दौर की सकारात्मक चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों की यह पुरानी मांग रही है कि उन्हें आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस प्राथमिकता के आधार पर दिए जाएं, क्योंकि सेवाकाल के दौरान हथियार उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। सरकार अब इस मांग को अमलीजामा पहनाने की तैयारी में है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दोहराया कि राज्य सरकार पूर्व सैनिकों और पूर्व अर्ध-सैनिकों के लिए एक सेवक के रूप में कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में भव्य सैन्यधाम का निर्माण कार्य भी अब अंतिम चरण में है। साथ ही, अग्निवीर योजना के तहत सेवानिवृत्त होने वाले सैनिकों के लिए पुलिस, जेल प्रहरी और वन विभाग की भर्तियों में 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। सरकार ने इन विभागों को दिसंबर माह से पूर्व रिक्तियां निकालने के निर्देश दिए हैं।
इसके अलावा, सरकार प्राइवेट सेक्टर में भी अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दे रही है और उनके लिए स्वरोजगार की योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं। भविष्य की रणनीति के तहत सरकार का प्रयास है कि सेवानिवृत्त सैनिकों और उनके बच्चों को राष्ट्र निर्माण के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से जोड़कर उनका भविष्य सुरक्षित किया जाए।











