नई दिल्ली, 01 जून।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आदर्श शिक्षक के गुणों को रेखांकित करते हुए संस्कृत का एक सुभाषित साझा किया है। उन्होंने कहा कि कुछ व्यक्ति किसी कार्य को स्वयं करने में अत्यंत दक्ष होते हैं, जबकि कुछ लोग उस ज्ञान और कौशल को दूसरों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में विशेष निपुणता रखते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आत्मनियंत्रण और शिक्षण क्षमता दोनों से युक्त व्यक्ति ही श्रेष्ठ शिक्षक की श्रेणी में आता है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच पर संस्कृत श्लोक साझा करते हुए कहा कि ज्ञान प्राप्त करने के साथ-साथ उसे दूसरों को सिखाने की क्षमता रखने वाला व्यक्ति शिक्षकों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने योग्य होता है। इस विचार को उन्होंने शिक्षण की उत्कृष्टता का आधार बताया।
साझा किए गए सुभाषित में यह भाव व्यक्त किया गया है कि कुछ लोग अभ्यास में दक्ष होते हैं और कुछ शिक्षण में, लेकिन जो व्यक्ति किसी विषय में पारंगत होने के साथ-साथ उसे प्रभावी ढंग से दूसरों तक पहुंचाने की क्षमता रखता है, वही शिक्षकों की सर्वोच्च श्रेणी में प्रतिष्ठित होता है।











