कोलकाता, 05 जून।
पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार आरोपियों को कमर में रस्सी बांधकर सार्वजनिक रूप से सड़कों पर घुमाने के मामलों पर कलकत्ता उच्च न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। न्यायमूर्ति जय सेनगुप्ता और न्यायमूर्ति स्मिता दास दे की खंडपीठ ने इस अमानवीय व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पुलिस को कानून के दायरे में कार्रवाई करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी परिस्थिति में आरोपित की गरिमा को ठेस पहुँचाना स्वीकार्य नहीं है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बचाव में कहा कि जिन आरोपियों पर वसूली जैसे गंभीर आरोप हैं, उन्हें अक्सर अपराध स्थल पर पुनर्निर्माण प्रक्रिया के लिए ले जाया जाता है। इस पर न्यायालय ने तीखी टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या ऐसे मामलों में आरोपितों के भागने की वास्तविक आशंका होती है और क्या बिना सार्वजनिक प्रदर्शन के सुरक्षा संभव नहीं है।
न्यायालय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पुलिस को आरोपियों की सुरक्षा और मानवाधिकारों का संतुलन बनाकर रखना चाहिए। राज्य सरकार को तीन सप्ताह के भीतर लिखित रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें इस विवादास्पद कार्यप्रणाली के औचित्य को स्पष्ट करना होगा। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।















