कोलकाता, 05 जून।
पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के भीतर मचे आंतरिक घमासान और पार्टी में संभावित दरार की खबरें एक बार फिर गरमा गई हैं। इस बार चर्चाओं के केंद्र में लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तिदार हैं, जिनके सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक रहस्यमयी पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस टिप्पणी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व के प्रति सीधे असंतोष के तौर पर देखा जा रहा है।
काकोली घोष ने अपने पोस्ट में परोक्ष रूप से संकेत दिए कि जनता ने पिछली सरकारों की गलत नीतियों को नकारने का जो जनादेश दिया था, उसे शासन के स्तर पर शायद पूरी तरह आत्मसात नहीं किया गया। उनका यह रुख पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी को स्पष्ट करता है।
इससे पहले मुख्यमंत्री ने धर्मतला में बिना नाम लिए कुछ नेताओं पर निशाना साधा था, जिसमें टिकट न मिलने के कारण भड़ास निकालने की बात कही गई थी। जवाब में काकोली ने अपने लंबे राजनीतिक संघर्ष और निष्ठा को याद दिलाते हुए सम्मान न मिलने का दर्द बयां किया।
पार्टी के भीतर यह तनाव तब और गहरा गया जब लोकसभा में तृणमूल संसदीय दल में सांगठनिक फेरबदल करते हुए काकोली घोष से मुख्य सचेतक का पद छीन लिया गया और यह दायित्व कल्याण बनर्जी को सौंप दिया गया। इसके बाद से ही पार्टी के विभिन्न मंचों और बैठकों में नेताओं के अलग-अलग सुर सुनाई दे रहे हैं, जो एकजुटता पर सवाल उठा रहे हैं।
हाल के समय में विधानसभा स्तर पर विपक्षी नेता के चुनाव को लेकर भी पार्टी के विधायकों में मतभेद देखे गए थे, जिसके बाद अब लोकसभा में नेतृत्व के भविष्य को लेकर अटकलें तेज हैं।
यद्यपि पार्टी के दिग्गज नेताओं की ओर से फिलहाल इस आंतरिक कलह पर चुप्पी साधी गई है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में तृणमूल की लोकसभा रणनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिसमें काकोली घोष दस्तिदार का अगला कदम निर्णायक साबित होगा।















