श्योपुर, 05 जून ।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कूनो नेशनल पार्क से वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में उत्साहजनक खबर सामने आई है। दशकों बाद यहां दुर्लभ कैराकल (जंगली बिल्ली) की मौजूदगी दर्ज की गई है। हाल ही में किए गए कैमरा ट्रैप सर्वेक्षण में इसकी तस्वीरें सामने आने के बाद वन्य जीव विशेषज्ञों और वन विभाग में उत्साह का माहौल है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि कैराकल की वापसी कूनो क्षेत्र में लगातार मजबूत हो रहे जैव विविधता तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार द्वारा वन्य जीव संरक्षण और प्राकृतिक आवासों के संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सकारात्मक परिणाम है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस प्रकृति संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के संकल्प को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है। कूनो में इस दुर्लभ प्रजाति की पुनः उपस्थिति यह दर्शाती है कि संरक्षित वन क्षेत्रों में संरक्षण गतिविधियां प्रभावी रूप से आगे बढ़ रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में संचालित प्रोजेक्ट चीता ने मध्यप्रदेश को वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। यह परियोजना केवल चीता प्रजाति के पुनर्वास तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पहल के तहत वन क्षेत्रों के संरक्षण, दुर्लभ वन्य प्रजातियों की संख्या में वृद्धि और वन्य जीवों के लिए सुरक्षित आवास विकसित करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से प्रदेश में जैव विविधता संरक्षण को और मजबूती मिलेगी।
डॉ. यादव ने कहा कि कूनो नेशनल पार्क आज वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में एक सफल मॉडल के रूप में स्थापित हो रहा है। प्रोजेक्ट चीता के प्रभावी क्रियान्वयन के कारण यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी लगातार चर्चा का केंद्र बना हुआ है।




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