मध्य प्रदेश
05 Jun, 2026

स्थानीय निकायों की आत्मनिर्भरता पर फोकस, नर्मदापुरम दौरे पर जाएगा वित्त आयोग

राज्य वित्त आयोग ने स्थानीय निकायों की वित्तीय मजबूती, पारदर्शिता और राजस्व वृद्धि को लेकर समीक्षा कर 6 जून को नर्मदापुरम संभाग के दौरे की तैयारी की है।

भोपाल, 5 जून ।

मध्यप्रदेश राज्य वित्त आयोग 6 जून को नर्मदापुरम संभाग का दौरा कर वहां के जिलों की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगा। इस दौरान संबंधित जिलों के कलेक्टर, नगर निकायों के अधिकारी और अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहेंगे।

दौरे से पहले शुक्रवार को मंत्रालय में राज्य वित्त आयोग ने वित्त विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा वाणिज्यिक कर विभाग के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। आयोग के अध्यक्ष श्री जयभान सिंह पवैया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में स्थानीय निकायों की वित्तीय स्थिति, राजस्व संसाधनों और बजटीय प्रबंधन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में आयोग के सदस्य श्री के.के. सिंह और सदस्य सचिव श्री वीरेन्द्र कुमार सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को अधिक मजबूत और सक्षम बनाने के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करने पर जोर दिया गया। अध्यक्ष श्री पवैया ने ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों की वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सभी विभागों को आवश्यक आंकड़ों का संकलन कर विस्तृत सुझाव और अनुशंसाएं तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्रीय और राज्य वित्त आयोगों की अनुशंसाओं के तहत मिलने वाले अनुदानों की वर्तमान स्थिति की भी समीक्षा की।

आयोग ने स्थानीय निकायों की लेखा और ऑडिट प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में आगामी सोलहवें वित्त आयोग के लिए जरूरी वित्तीय आंकड़ों और रणनीतिक तैयारियों पर भी विचार-विमर्श किया गया, ताकि राज्यों को उपलब्ध होने वाले संसाधनों का अधिकतम लाभ सुनिश्चित किया जा सके। चुंगी क्षतिपूर्ति और संविधान के अनुच्छेद 275 के अंतर्गत प्राप्त होने वाली राशि के हस्तांतरण की स्थिति पर भी चर्चा हुई।

वाणिज्यिक कर विभाग ने राज्य के कर राजस्व, वस्तु एवं सेवा कर व्यवस्था के प्रभाव तथा जीएसटी लागू होने के बाद प्राप्त क्षतिपूर्ति का विवरण प्रस्तुत किया। समीक्षा के दौरान इस बात पर विचार किया गया कि बदलते कर ढांचे में स्थानीय निकायों के राजस्व स्रोतों को और अधिक मजबूत कैसे बनाया जाए। संपत्ति अंतरण पर अतिरिक्त मुद्रांक शुल्क तथा अन्य कराधान प्रावधानों की भी समीक्षा की गई, जिससे निकायों की आंतरिक आय में वृद्धि संभव हो सके।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर पंचम, पंद्रहवें और सोलहवें वित्त आयोग से प्राप्त राशि और उसके उपयोग की स्थिति का परीक्षण किया गया। पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 के प्रावधानों, ग्राम स्तर पर सेवा प्रदायगी, पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, पंच-परमेश्वर योजना के अंतर्गत अधोसंरचना विकास और ई-पंचायत प्रणाली की प्रगति की भी समीक्षा की गई। पंचायतों की आय के स्रोतों, कर संग्रहण क्षमता और शेल्टर टैक्स से जुड़े प्रावधानों पर भी चर्चा हुई।

बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि स्थानीय निकायों की अनुदानों पर निर्भरता कम कर उन्हें वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। कर संग्रहण क्षमता बढ़ाने, अनटाइड अनुदानों के प्रभावी उपयोग और बेहतर वित्तीय प्रबंधन के लिए विभिन्न विभागों से सुझाव प्राप्त किए गए हैं। इन्हीं सुझावों के आधार पर राज्य वित्त आयोग अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करेगा।

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