नई दिल्ली, 08 अप्रैल 2026।
भारत ने विश्व में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। केंद्रीय मंत्री प्रद्युम्न जोशी ने बुधवार को बताया कि भारत ने ब्राजील को पीछे छोड़ते हुए चीन और अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर अपना कब्जा जमा लिया है।
अंतरराष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 तक भारत की कुल गैर-जीवाश्म ईंधन स्थापित क्षमता 283.46 गीगावाट तक पहुंच गई है, जिसमें 274.68 गीगावाट नवीकरणीय स्रोतों और 8.78 गीगावाट परमाणु ऊर्जा से प्राप्त है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में देश ने 55.3 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता जोड़कर एक रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। जून 2025 में भारत ने अपने कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया, जो पेरिस समझौते के 2030 लक्ष्य से पांच साल पहले है।
जुलाई 2025 में नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों ने देश की 203 गीगावाट बिजली मांग का 51.5 प्रतिशत पूरा किया, जो अब तक का उच्चतम स्तर है। पूरे वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवीकरणीय ऊर्जा (बड़ी हाइड्रो सहित) ने कुल उत्पादन का 26.2 प्रतिशत योगदान दिया, जबकि गैर-जीवाश्म स्रोतों का हिस्सा 29.2 प्रतिशत रहा।
सौर ऊर्जा भारत की नवीकरणीय वृद्धि का मुख्य स्रोत बनी रही, जिसकी स्थापित क्षमता 150.26 गीगावाट तक पहुंच गई, जो 2014 से 53 गुना अधिक है। पवन ऊर्जा की क्षमता भी 56.09 गीगावाट तक बढ़ी। FY 2025-26 में सौर ऊर्जा में 44.61 गीगावाट की सबसे बड़ी वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई, जिसमें यूटिलिटी-स्केल, रूफटॉप परियोजनाएं और पीएम कुसुम योजना मुख्य योगदान रही।
पवन ऊर्जा ने भी 6.05 गीगावाट की रिकॉर्ड वार्षिक वृद्धि दर्ज की, जिससे भारत की वैश्विक पवन ऊर्जा नेतृत्व की स्थिति और मजबूत हुई।
निर्माण और आत्मनिर्भरता में वृद्धि हुई है। सौर मॉड्यूल निर्माण क्षमता 2014 में 2.3 गीगावाट से बढ़कर 2026 में 172 गीगावाट हो गई, जबकि पवन टरबाइन निर्माण क्षमता 24 गीगावाट तक पहुंच गई। जीएसटी में कटौती और घरेलू बैटरी निर्माण के प्रोत्साहनों से यह वृद्धि संभव हुई।
केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में कई नीति पहलें शुरू कीं, जिनमें नवीकरणीय उपकरण पर जीएसटी घटाकर 5 प्रतिशत करना, REEIMS प्रणाली, वर्चुअल पावर खरीद समझौते, कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस पायलट योजना और भू-तापीय ऊर्जा नीति शामिल हैं। CERC द्वारा नियामक सुधारों से ग्रिड एक्सेस और ट्रांसमिशन दक्षता में सुधार हुआ है।
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत ने तेजी से प्रगति की है, जिसमें 2030 तक 5 मिलियन मीट्रिक टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस पहल से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश, 6 लाख से अधिक रोजगार और कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी की उम्मीद है।
सरकार ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर परियोजना और 345 गीगावाट क्षमता वाले नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्रों की पहचान कर अवसंरचना मजबूत की है। कार्यबल में 1.24 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया गया।
भारत 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म क्षमता का लक्ष्य हासिल कर वैश्विक स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की ओर अग्रसर है, जबकि ग्रिड एकीकरण, भंडारण और आपूर्ति श्रृंखला चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन मजबूत नीति समर्थन, तकनीकी प्रगति और निवेश वृद्धि से गति बनी रहेगी।









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