पेरिस, 22 अप्रैल
ईरान युद्ध से उत्पन्न मौजूदा संघर्ष के कारण वैश्विक प्राकृतिक गैस मांग पर गंभीर असर पड़ सकता है और यदि यह स्थिति लंबी चलती है तो यह अस्थायी नहीं बल्कि स्थायी ढांचे में बदल सकती है, ऐसा गैस निर्यातक देशों के मंच के प्रमुख अधिकारी ने कहा है।
अफ्रीका में ऊर्जा निवेश सम्मेलन के दौरान उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व में जारी संकट की शुरुआत फरवरी के अंत से हुई थी, जिसके बाद वैश्विक बाजार से 500 मिलियन बैरल कच्चा तेल और कंडेनसेट की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसे आधुनिक समय की सबसे बड़ी ऊर्जा आपूर्ति बाधा माना जा रहा है।
खाड़ी देशों पर निर्भर राष्ट्रों ने इस संकट से निपटने के लिए कोयले के उपयोग की ओर रुख किया है और नवीकरणीय ऊर्जा की ओर तेजी से बदलाव शुरू कर दिया है।
गैस निर्यातक देशों के संगठन के प्रमुख ने कहा कि वर्तमान में यह बदलाव केवल तात्कालिक प्रतिक्रिया है, लेकिन यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो यह स्थायी संरचना का हिस्सा बन सकता है। उन्होंने कहा कि यदि यह संघर्ष आज समाप्त हो जाए तो छह महीने से एक वर्ष में स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक जारी रहने पर बाजार की स्थिति पूरी तरह बदल सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष 2026 को गैस क्षेत्र के लिए संतुलन का वर्ष माना जा रहा था, जहां वैश्विक बाजार तंगी से अधिशेष की स्थिति में जाने वाला था, लेकिन संघर्ष ने इस संभावना को प्रभावित किया है।
अफ्रीकी देशों के लिए उन्होंने कहा कि यह स्थिति अवसर होते हुए भी चुनौती बन गई है, क्योंकि कई देश अपनी गैस उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। अल्जीरिया और लीबिया से यूरोप को जाने वाली गैस पाइपलाइनें भी पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रही हैं।
इस कारण उत्तर अमेरिकी उत्पादक यूरोप और एशिया के बाजारों में बढ़त हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संकट के समय अवसर होते हुए भी अफ्रीका इसका लाभ नहीं उठा पा रहा है, क्योंकि उत्पादन क्षमता सीमित है, जबकि भंडार जमीन के भीतर मौजूद हैं।








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