वाराणसी, 01 मई।
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मंदिर न्यास द्वारा ऐप आधारित नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिसे एक मई से चरणबद्ध रूप से शुरू किया जाना है।
इस व्यवस्था को लेकर शुक्रवार को राजनीतिक विरोध भी सामने आया, जिसमें कांग्रेस ने इसे आस्था के खिलाफ कदम बताया। वाराणसी महानगर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि बाबा विश्वनाथ के दरबार को किसी भी रूप में व्यापारिक मॉडल में बदलने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि काशी केवल एक शहर नहीं बल्कि सनातन परंपरा की जीवंत चेतना है, जहां सदियों से श्रद्धालु बिना किसी तकनीकी बाधा के बाबा के दर्शन करते आए हैं। ऐसे में अब ऐप और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से व्यवस्था लागू करना परंपरा के विपरीत है।
आरोप लगाया गया कि यह व्यवस्था प्रशासनिक आदेशों के तहत थोपी जा रही है, जिससे मंदिर की पारंपरिक दर्शन व्यवस्था प्रभावित हो रही है। साथ ही यह भी कहा गया कि श्रद्धा और परंपरा को डिजिटल नियंत्रण में सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कांग्रेस की ओर से यह भी कहा गया कि मंदिर प्रशासन के अधिकारी अपनी सीमा से बाहर जाकर निर्णय ले रहे हैं, जिससे भक्तों की आस्था और परंपरा पर असर पड़ रहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पार्टी काशी की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं की रक्षा के लिए आगे भी आवाज उठाती रहेगी।










