मंडला, 30 अप्रैल।
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में स्थित देश के प्रमुख कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले नौ दिनों के भीतर एक बाघिन और उसके चार शावकों की मौत के मामले में अहम संकेत सामने आए हैं। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में इन सभी मौतों के पीछे घातक केनाइन डिस्टेंपर वायरस संक्रमण की आशंका जताई गई है।
कान्हा टाइगर रिजर्व के उप निदेशक प्रकाश कुमार वर्मा ने गुरुवार को जानकारी दी कि जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्ड लाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ में किए गए परीक्षणों में इस वायरस के संकेत मिले हैं, हालांकि विस्तृत रिपोर्ट अभी प्राप्त होना शेष है।
उल्लेखनीय है कि बाघिन टी-141 के तीन शावकों की मौत 21 से 25 अप्रैल के बीच हो गई थी। इसके बाद गंभीर रूप से बीमार बाघिन और उसके बचे हुए एकमात्र शावक को रेस्क्यू कर मुक्की क्वारंटाइन सेंटर में रखा गया, लेकिन बुधवार 29 अप्रैल को बाघिन टी-141 और उसके चौथे शावक की भी मृत्यु हो गई। इस तरह कुल पांच बाघों की मौत हो चुकी है। इसके बाद जबलपुर से आई पशु चिकित्सकों की टीम ने मौके पर जांच कर नमूने एकत्र किए थे।
प्रारंभिक जांच में बाघिन और शावकों में केनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण पाए जाने की पुष्टि हुई है। यह संक्रमण मुख्य रूप से जंगली मांसाहारी जीवों के श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है। पोस्टमार्टम में शावकों का पेट खाली मिलना और फेफड़ों में संक्रमण की पुष्टि भी इसी बीमारी की ओर संकेत करती है। यह वायरस बाघों के लिए अत्यंत घातक माना जाता है।
जानकारी के अनुसार यह वायरस संक्रमित कुत्तों के माध्यम से जंगली जानवरों में फैलता है और तेजी से संक्रमण करता है। फिलहाल अंतिम पुष्टि के लिए अतिरिक्त परीक्षण जारी हैं, ताकि इसके प्रसार को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें।






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