नई दिल्ली, 27 अप्रैल।
दिल्ली में एक महिला वकील पर हुए हमले के मामले में उच्चतम न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए गंभीर रुख अपनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली पुलिस आयुक्त को निर्देश दिया है कि इस पूरे प्रकरण की जांच एसीपी या डीसीपी स्तर की महिला पुलिस अधिकारी से कराई जाए।
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन तीन अस्पतालों ने पीड़िता महिला वकील को भर्ती करने से इनकार किया था, उनकी भूमिका की भी विस्तृत जांच की जाए। इस दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने जानकारी दी कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पीड़िता के पति मनोज कुमार को सोनिया विहार क्षेत्र से 25 और 26 अप्रैल की मध्य रात्रि में गिरफ्तार किया गया है।
बताया गया कि आरोपी पति पर 22 अप्रैल को अपनी पत्नी पर चाकू से हमला करने का आरोप है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि पारिवारिक विवाद के चलते उसने यह हमला किया था।
न्यायालय ने सुनवाई के दौरान यह भी पाया कि शिकायत में उल्लेख है कि महिला वकील के ससुराल पक्ष द्वारा उसके दो नाबालिग बच्चों को अपने साथ ले जाया गया है, जिनका अब तक कोई पता नहीं चल सका है। इस पर अदालत ने दोनों बच्चों की तत्काल खोज के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ ही जांच अधिकारी को पूरे मामले की स्थिति रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया गया है।



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