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28 Apr, 2026

राजा हिरदे शाह की शौर्य यात्रा में बड़ा ऐलान, पाठ्यक्रम में जुड़ेगा इतिहास

भोपाल में आयोजित शौर्य यात्रा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजा हिरदे शाह लोधी के जीवन को पाठ्यक्रम में शामिल करने और तीर्थ स्थल निर्माण की घोषणा करते हुए सामाजिक एकता और सांस्कृतिक पुनरुत्थान पर जोर दिया।

भोपाल, 28 अप्रैल

राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में मंगलवार को आयोजित राजा हिरदे शाह लोधी की शौर्य यात्रा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने समाज को बड़े लक्ष्यों के लिए समर्पित होने का संदेश देते हुए कहा कि जीवन एक बार मिलता है और इसे महान कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मध्यप्रदेश में राजा हिरदे शाह लोधी के जीवन और संघर्ष को न केवल पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, बल्कि उनके नाम से तीर्थ स्थल का निर्माण भी कराया जाएगा। उन्होंने राजा हिरदे शाह के साहस और योगदान को याद करते हुए कहा कि ऐसे महापुरुषों के कारण समाज गर्व के साथ आगे बढ़ता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन अत्यंत पवित्र है और मनुष्य जीवन लंबे संघर्षों के बाद प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि नर्मदा टाइगर के नाम से पहचाने जाने वाले राजा हिरदे शाह ने वर्ष 1842 में अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष का संकल्प लिया था और वर्ष 1858 तक अपने साथियों के साथ आंदोलन जारी रखा। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है और संघर्ष करने वालों का समाज सदैव सम्मान करता है। उन्होंने यह भी बताया कि बुंदेलखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट कर उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन को मजबूत किया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार उनके जीवन पर शोध कराएगी और महत्वपूर्ण घटनाओं को संकलित कर शिक्षा विभाग के पाठ्यक्रम में शामिल करेगी। साथ ही प्रदेश की विरासत और ऐतिहासिक हस्तियों के सम्मान में पहले ही सागर में रानी अवंतीबाई के नाम पर राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की जा चुकी है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही है और सनातन परंपराओं के सभी पर्व उत्साह के साथ मनाए जा रहे हैं। किसानों के हित में कृषक कल्याण वर्ष भी मनाया जा रहा है। नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदे शाह के नाम पर तीर्थ स्थल विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही विक्रमादित्य पर शोध संस्थान स्थापित किया गया है और प्रत्येक नगरीय निकाय में गीता भवन तथा जनपदों में वृंदावन ग्राम विकसित किए जा रहे हैं।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने समाज से आह्वान किया कि संघर्ष से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने उमा भारती और प्रह्लाद पटेल के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज को संघर्ष को शक्ति के रूप में स्वीकार करना चाहिए। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का पारंपरिक रूप से स्वागत किया गया और उन्हें गदा तथा शौर्य मशाल भेंट की गई।

भारी गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम में शामिल हुए। मंच से सामाजिक एकता, समानता और इतिहास के गौरव को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इस दौरान एक सुरक्षाकर्मी की तबीयत बिगड़ने पर उसे तत्काल सहायता दी गई।

उमा भारती ने दिया बड़ा संदेशपूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आरक्षण को लेकर कहा कि जब तक शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के परिवार सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ेंगे, तब तक आरक्षण को कोई समाप्त नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक बराबरी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और असमानता समाप्त करने के लिए व्यवहार में बदलाव आवश्यक है।

उन्होंने यह भी कहा कि लोधी समाज की बड़ी आबादी है और उसकी राजनीतिक भागीदारी सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाती है। अंत में उन्होंने कहा कि देश ने स्वतंत्रता की दो बड़ी लड़ाइयां देखी हैं और अब तीसरी लड़ाई सामाजिक समानता की है।

प्रह्लाद पटेल का संबोधनकैबिनेट मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि समाज को आत्ममंथन की आवश्यकता है और जीवन में वही बात कहनी चाहिए जो स्वयं जी गई हो। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो धन की चाह है और न ही पद की, लेकिन जीवन में किसी भी प्रकार का कलंक स्वीकार नहीं है। उन्होंने समाज से धैर्य और संयम के साथ आगे बढ़ने की अपील की और कहा कि क्षमता का सही उपयोग ही वास्तविक सफलता है।

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