रायपुर, 14 अप्रैल।
छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। जांच में सामने आया कि जिले में 2,163 मृत किसानों के नाम पर भी योजना की राशि भेजी जा रही थी, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच प्रक्रिया के दौरान यह भी स्पष्ट हुआ कि इनमें से 1,310 किसान ऐसे पाए गए जो योजना की पात्रता शर्तों के अनुरूप नहीं थे। इन सभी अपात्र किसानों की पहचान कर उनके नाम हटाने की सूची तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेज दी गई है। साथ ही संदिग्ध सभी बैंक खातों को फिलहाल ब्लॉक कर दिया गया है। कृषि विभाग के अनुसार कई मामलों में किसानों की मृत्यु के बाद उनके परिजनों द्वारा विभाग को सूचना नहीं दी गई, जिसके कारण गलत तरीके से राशि का लाभ जारी रहा।
यह पूरा मामला अप्रैल 2026 के मध्य में किए गए भौतिक सत्यापन के दौरान उजागर हुआ है। प्रशासन ने अब तक 11 हजार से अधिक संदिग्ध खातों की पहचान की है और उन्हें भी रोक दिया गया है। अपात्र लाभार्थियों से भुगतान की गई राशि की वसूली के लिए विभाग की ओर से वसूली नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
जिले में इस योजना के अंतर्गत कुल 92,518 किसान पंजीकृत हैं। जांच में यह भी सामने आया कि वर्षों तक न तो नियमित सत्यापन हुआ और न ही परिजनों ने आवश्यक जानकारी साझा की, जिसके कारण अपात्र और मृत किसानों के नाम पर भी करोड़ों रुपये का भुगतान होता रहा।
हाल ही में जारी 22वीं किस्त के तहत जिले के किसानों के खातों में 18.71 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए, जिसके बाद यह अनियमितता उजागर हुई। अब पूरे मामले की विस्तृत जांच की जा रही है ताकि गलत तरीके से ली गई राशि की वसूली की जा सके।
इसी बीच कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें पात्र किसान सूची में शामिल होने के बावजूद उन्हें राशि नहीं मिली। इससे किसानों में असंतोष बढ़ा है। रीको गांव के ओमप्रकाश यदु, रामचरण पटेल, दीनानाथ साहू, चितरेखा साहू और रजनीकांत बंजारे ने बताया कि वे पहले नियमित रूप से लाभ प्राप्त कर रहे थे, लेकिन इस वर्ष उनकी राशि नहीं आई, जिसकी उन्होंने शिकायत दर्ज कराई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना में भी लगभग दस प्रतिशत लाभार्थियों के खातों में वर्ष 2026 की किस्त अब तक नहीं पहुंची है, जबकि उनका नाम पात्र सूची में शामिल है और पंजीयन प्रक्रिया पूर्ण है। विभागीय स्तर पर त्रुटि सुधार प्रणाली के माध्यम से डेटा को दुरुस्त किया जा रहा है ताकि केवल वास्तविक पात्र किसानों को ही लाभ मिल सके। शासन ने स्पष्ट किया है कि मृत या अपात्र किसानों के परिजनों को गलत तरीके से प्राप्त राशि लौटानी होगी।




.jpg)
.jpg)



.jpg)


