भोपाल, 15 अप्रैल।
लोक निर्माण विभाग में टेंडर प्रक्रिया को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसमें इंदौर और सागर सेतु संभाग में करोड़ों रुपये के कार्यों में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। जांच समिति की रिपोर्ट में इन दोनों टेंडरों को निरस्त करने के साथ ही संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की अनुशंसा की गई है।
मार्च 2026 की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर सेतु संभाग में लगभग 30 करोड़ रुपये के एक टेंडर में गड़बड़ी उजागर हुई है। यह कार्य खंडवा जिले के ओंकारेश्वर क्षेत्र में कावेरी नदी पर पैदल पुल निर्माण से संबंधित था। प्रक्रिया के दौरान तीन कंपनियों में से गुजरात और हरियाणा की दो कंपनियों को बिना स्पष्ट कारण बताए अयोग्य घोषित कर दिया गया, जबकि भोपाल की एक कंपनी को ठेका दे दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित कंपनी आवश्यक मशीनरी मानकों पर खरी नहीं उतर रही थी।
इस प्रकरण में इंदौर की एक कार्यपालन यंत्री की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिस पर जांच समिति ने सवाल उठाए हैं।
इसी तरह सागर सेतु संभाग में करीब 7.87 करोड़ रुपये के टेंडर में भी गड़बड़ियां सामने आई हैं। यहां चार फर्मों में से दो को बाहर कर एक कंपनी को कार्य सौंप दिया गया, जबकि जांच में पाया गया कि उस कंपनी का पूर्व कार्य अधूरा था, फिर भी उसे पात्र मान लिया गया।
इस मामले में सागर के एक कार्यपालन यंत्री की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है और उनके निर्णयों पर सवाल खड़े किए गए हैं।
जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में दोनों टेंडरों को तत्काल रद्द करने और नई प्रक्रिया को पारदर्शी तथा सख्त शर्तों के साथ दोबारा शुरू करने की सिफारिश की है। साथ ही उपकरणों की जांच और पूर्व कार्यों के सत्यापन को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है। संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने का सुझाव भी दिया गया है।
हालांकि, दोनों अधिकारियों ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है। एक अधिकारी ने सभी प्रक्रियाओं को नियमों के अनुरूप बताया, जबकि दूसरे ने इसे त्रुटि बताते हुए विभाग को अपना जवाब सौंपा है।
यह पूरा मामला टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब यह देखना होगा कि शासन और विभाग इस रिपोर्ट पर क्या कदम उठाते हैं।









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