जबलपुर, 15 अप्रैल।
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर की एकलपीठ ने नर्सिंग ऑफिसर भर्ती प्रक्रिया में 100 प्रतिशत पदों को केवल महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए 10 पुरुष याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायालय ने उन्हें मेडिकल कॉलेजों में नर्सिंग ऑफिसर के विज्ञापित पदों पर आवेदन करने तथा भर्ती प्रक्रिया में शामिल किए जाने के निर्देश दिए हैं, जबकि उनका परिणाम अंतिम निर्णय के अधीन रहेगा।
अदालत ने इस मामले में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग सहित मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। यह आदेश बुधवार को दिया गया।
याचिकाकर्ताओं ने अधिवक्ता के माध्यम से दायर याचिका में हाल ही में जारी नर्सिंग ऑफिसर भर्ती विज्ञापन को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि कर्मचारी चयन मंडल द्वारा नर्सिंग ऑफिसर एवं सिस्टर ट्यूटर भर्ती परीक्षा 2026 के तहत नर्सिंग ऑफिसर के सभी पद केवल महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित कर दिए गए हैं, जिससे पुरुष अभ्यर्थियों को पूरी तरह से आवेदन से वंचित कर दिया गया है।
तर्क दिया गया कि मध्य प्रदेश चिकित्सा शिक्षा (अराजपत्रित) सेवा भर्ती एवं पदोन्नति नियम 2023 के अंतर्गत नर्सिंग ऑफिसर पद के लिए किसी भी प्रकार का लिंग आधारित प्रतिबंध निर्धारित नहीं है, इसलिए विज्ञापन का यह प्रावधान नियमों के विपरीत है। यह भी कहा गया कि पुरुष एवं महिला अभ्यर्थी एक ही शैक्षणिक पाठ्यक्रम बीएससी नर्सिंग अथवा जीएनएम पढ़ते हैं तथा उनकी योग्यता और पंजीकरण समान होते हैं।
याचिका में यह भी कहा गया कि केवल लिंग के आधार पर सार्वजनिक रोजगार से पूर्णतः वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 16 का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं ने प्रार्थना की है कि भर्ती विज्ञापन के उस हिस्से को निरस्त किया जाए, जिसमें 100 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं।









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