कोलकाता, 08 मई।
पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन को लेकर जारी राजनीतिक चर्चाओं के बीच तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई हैं। इस समय वे मुख्यमंत्री पद पर नहीं हैं, लेकिन उनके सोशल मीडिया खाते में अब भी उनकी पहचान “मुख्यमंत्री” के रूप में दर्ज है, जिस पर विवाद खड़ा हो गया है।
इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि राज्यपाल के निर्देश और विधानसभा भंग होने के बाद भी सोशल मीडिया पर “मुख्यमंत्री” शब्द का उपयोग संवैधानिक मर्यादाओं पर प्रश्न खड़ा करता है।
ममता बनर्जी पहले ही चुनाव परिणामों को लेकर अपनी असहमति व्यक्त कर चुकी हैं। उन्होंने इसे जनादेश न मानते हुए एक राजनीतिक साजिश बताया था और मुख्यमंत्री पद छोड़ने से भी इनकार किया था। हालांकि संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर दिया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में उनके सोशल मीडिया खाते पर “मुख्यमंत्री” शब्द का बना रहना केवल तकनीकी स्थिति नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। इस विषय पर अभी तक उनकी पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में ममता बनर्जी ने लंबे समय से चले आ रहे वाम शासन का अंत कर पश्चिम बंगाल की सत्ता संभाली थी। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री ने चुनाव परिणाम स्वीकार करते हुए बिना विवाद के अपना पद छोड़ दिया था और जनता के फैसले को स्वीकार किया था।
वर्तमान में 2026 में राज्य की राजनीति एक बार फिर नए मोड़ पर पहुंच गई है और सत्ता परिवर्तन की चर्चाएं तेज हैं। आने वाले समय में राजनीतिक घटनाक्रम किस दिशा में आगे बढ़ता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।



.jpg)


.jpg)

.jpg)


