मुरैना, 11 अप्रैल।
मुरैना जिले में वन आरक्षक की मौत के बाद चंबल नदी की तलहटी में जमा रेत को हटाने की टास्कफोर्स कार्रवाई को केवल औपचारिक प्रक्रिया माना जा रहा है, क्योंकि सुबह और रात के समय अब भी नदी से रेत का अवैध परिवहन करने वाले सैकड़ों वाहन सड़कों पर तेज रफ्तार से दौड़ते देखे जा रहे हैं।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वाहनों की सख्त रोक ही अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण का एकमात्र उपाय माना जा रहा है। विभाग की ओर से भविष्य में ऐसे वाहनों की पकड़ के लिए विशेष योजना बनाए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।
वन विभाग का दावा है कि पिछले दो दिनों में लगभग 3 करोड़ रुपये मूल्य की करीब 12 हजार ट्रॉली रेत को नष्ट किया गया है। यह कार्रवाई जिला टास्कफोर्स के नेतृत्व में प्रशासन, पुलिस, राजस्व, वन और खनिज विभाग की संयुक्त टीम द्वारा चंबल नदी के रेत घाटों पर लगातार की जा रही है।
जिला कलेक्टर के निर्देशों के बाद शुरू हुई यह कार्रवाई तीसरे दिन भी जारी रही। पहले दिन राजघाट होलापुरा और नगरा घाट पर कार्रवाई हुई, दूसरे दिन रायपुर, बरोठा और रहू का घाट शामिल रहे, जबकि तीसरे दिन बनवारा, रहू का घाट और टेंटरा क्षेत्र में रेत विनष्टीकरण किया गया।
चंबल नदी के 435 किलोमीटर क्षेत्र में राष्ट्रीय घड़ियाल अभ्यारण्य फैला हुआ है, जहां लंबे समय से अवैध रेत खनन की गतिविधियां सामने आती रही हैं। कई बार टास्कफोर्स और खनन माफिया के बीच टकराव की स्थिति भी बनी है। स्थानीय लोगों के अनुसार अधिकांश घाटों पर अब भी रेत की उपलब्धता बनी हुई है और इसे निजी वाहनों से ढोया जा रहा है, जिससे घड़ियालों के जीवन पर संकट बढ़ रहा है।
वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए कई स्थानों पर गहरी खाइयां खोदी जा रही हैं, ताकि नदी तट तक पहुंच रोकी जा सके। यह कार्य जेसीबी और लोडर मशीनों की मदद से किया जा रहा है।
विभागीय अधिकारी इस अभियान को निरंतर जारी रखने का दावा कर रहे हैं, जबकि आम लोग इसकी स्थिरता और प्रभावशीलता पर सवाल उठा रहे हैं। टास्कफोर्स प्रभारी के अनुसार अभियान लगातार जारी रहेगा और रेत निष्कासन की कार्रवाई आगे भी होती रहेगी।
एक जेसीबी चालक के अनुसार मशीनें किराये पर लाकर चंबल किनारे रेत फैलाने का कार्य किया जा रहा है और यह काम सुबह से देर शाम तक लगातार चल रहा है।


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