राजस्थान उच्च न्यायालय ने मादक पदार्थों से जुड़े एक मामले में दो आरोपियों को जमानत मिलने के बाद तीसरे आरोपी के जमानत आवेदन पर अदालत में उपस्थित न होने की स्थिति को गंभीरता से लेते हुए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
न्यायालय ने कोटा जिले से जुड़े इस प्रकरण में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को निर्देश दिया है कि यदि संबंधित आरोपी के पास कोई अधिवक्ता उपलब्ध नहीं है तो उसे नि:शुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह न्यायिक प्रक्रिया में उचित रूप से अपना पक्ष रख सके।
न्यायाधीश ने इनायत उर्फ बिट्टू की जमानत याचिका स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया और इस बात पर आश्चर्य व्यक्त किया कि इसी मामले में दो सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है, लेकिन तीसरा आरोपी केवल प्रक्रिया संबंधी स्थिति के कारण अदालत में अपनी जमानत याचिका प्रस्तुत नहीं कर सका है।
अदालत ने निर्देश दिया कि विधिक सेवा प्राधिकरण यह सुनिश्चित करे कि ऐसे मामलों में किसी भी व्यक्ति को कानूनी प्रतिनिधित्व के बिना न्याय प्रक्रिया का सामना न करना पड़े और उसे उचित सहायता दी जाए।
साथ ही न्यायालय ने पुलिस महानिदेशक को आदेश की प्रति भेजते हुए कहा कि इस मामले में बिना किसी प्रत्यक्ष बरामदगी के आरोपित के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया गया है, जिस पर गंभीरता से विचार किया जाना आवश्यक है।
अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि याचिकाकर्ता से कोई बरामदगी नहीं हुई है और वह उन व्यक्तियों के साथ सीधे संलिप्त भी नहीं पाया गया, जिनसे बरामदगी की गई थी, फिर भी उसके विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया।
न्यायालय ने कहा कि अब यह जिम्मेदारी ट्रायल कोर्ट की है कि वह उपलब्ध सामग्री के आधार पर यह तय करे कि आरोप तय करने के लिए पर्याप्त आधार है या नहीं, साथ ही यदि आरोपी दोषमुक्त सिद्ध होता है तो उसे मुआवजा देने पर भी विचार किया जाना चाहिए।



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