नई दिल्ली, 07 मई
पाकिस्तान के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने अभियान से जुड़ी उपलब्धियों और रणनीतिक पहलुओं की जानकारी साझा की। अधिकारियों ने बताया कि इस अभियान के दौरान तीनों सेनाओं को पूर्ण स्वतंत्रता दी गई थी, जिससे उन्होंने जमीन, हवा और समुद्री क्षमताओं का समन्वित उपयोग करते हुए आतंकवादी ठिकानों पर सटीक कार्रवाई की।
सेना के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़ते हुए सीमा पार और नियंत्रण रेखा के उस पार स्थित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। इस पूरे ऑपरेशन में तीनों सेनाओं को खुली छूट दी गई, जिसके चलते रणनीतिक निर्णय तेजी से लिए गए और दुश्मन को प्रभावी जवाब दिया गया।
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने प्रेस वार्ता में बताया कि ऑपरेशन सिंदूर में कुल नौ लक्ष्यों को सफलतापूर्वक निशाना बनाया गया, जिनमें सात भारतीय सेना और दो वायुसेना द्वारा पूरे किए गए। इन हमलों का उद्देश्य आतंकवादी ढांचे को कमजोर करना और उन्हें स्पष्ट संदेश देना था कि भारत की पहुंच से कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह अभियान केवल सैन्य कार्रवाई नहीं बल्कि तीनों सेनाओं, खुफिया एजेंसियों, साइबर इकाइयों और अन्य सुरक्षा तंत्रों के बीच मजबूत समन्वय का उदाहरण था। सभी इकाइयों ने मिलकर रियल टाइम इंटेलिजेंस और संयुक्त रणनीति के आधार पर कार्य किया।
इस अवसर पर यह भी बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर आज शाम इस अभियान पर आधारित एक फिल्म भी जारी की जाएगी। इसके साथ ही राजस्थान के जयपुर सैन्य स्टेशन में संयुक्त कमांडरों का सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें रक्षा मंत्री, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ और तीनों सेनाओं के प्रमुख शामिल होंगे।
अधिकारियों ने कहा कि इस ऑपरेशन में स्वदेशी रक्षा तकनीक का व्यापक उपयोग किया गया, जिसमें मिसाइल सिस्टम, रॉकेट, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर उपकरण शामिल थे। लगभग 65 प्रतिशत रक्षा उपकरण देश में ही निर्मित हैं, जो आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
उन्होंने यह भी कहा कि यह अभियान भारत की सामरिक क्षमता, समन्वय और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है और भविष्य में आतंकवाद के खिलाफ देश की नीति को और मजबूत आधार प्रदान करता है।












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