जींद, 16 मई।
ज्येष्ठ माह की अमावस्या के अवसर पर शनिवार को पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे, जहां उन्होंने सरोवर में स्नान कर पिंडदान और पितृ तर्पण कर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति तथा सुखद भविष्य की कामना की।
शुक्रवार शाम से ही इस ऐतिहासिक तीर्थ स्थल पर श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था और पूरी रात धर्मशालाओं में सत्संग एवं कीर्तन जैसे धार्मिक आयोजन चलते रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्ति भाव से सराबोर रहा।
शनिवार सुबह होते ही श्रद्धालुओं ने सरोवर में स्नान और पिंडदान की प्रक्रिया आरंभ कर दी, जो मध्यान्ह के बाद तक लगातार चलती रही। इस दौरान दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया और सूर्यदेव को जल अर्पित कर सुख-समृद्धि की कामना की।
पिंडतारक तीर्थ से जुड़ी मान्यता के अनुसार महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तप किया था, जिसके बाद युद्ध में मारे गए परिजनों के लिए पिंडदान किया गया था।
तभी से यह विश्वास प्रचलित है कि पांडू पिंडारा स्थित इस तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या के अवसर पर यहां पिंडदान का विशेष महत्व माना जाता है और देशभर से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
जयंती देवी मंदिर के पुजारी नवीन शास्त्री ने बताया कि पितृ दोष से मुक्ति के लिए ज्येष्ठ अमावस्या अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है तथा इस दिन स्नान, दान और पितरों का तर्पण करने से जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है, साथ ही जरूरतमंदों को दान करना भी अत्यंत शुभ फलदायी होता है।













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