नई दिल्ली, 01 मई।
असम के मुख्यमंत्री की पत्नी को लेकर कथित टिप्पणी से जुड़े मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को उच्चतम न्यायालय से मिली अग्रिम जमानत के फैसले का कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय केवल एक व्यक्ति से जुड़ा मामला नहीं है, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के शासन और न्यायपालिका की भूमिका जैसे मूलभूत सिद्धांतों से संबंधित है।
कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के दौरान उन्होंने कहा कि जब भी स्वतंत्रता का प्रश्न उठता है, न्यायपालिका नागरिकों की संरक्षक के रूप में अपनी भूमिका निभाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हर व्यक्ति कानून के अधीन है और जब हम अपने कर्तव्यों तथा न्याय की रक्षा करते हैं, तो वही व्यवस्था हमारी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।
उन्होंने आगे बताया कि यह मामला विभिन्न स्तरों से गुजरते हुए मजिस्ट्रेट न्यायालय से शुरू होकर उच्च न्यायालय और फिर सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद यह प्रकरण एक अन्य उच्च न्यायालय में भी विचाराधीन रहा, जिसके पश्चात अंतिम निर्णय सर्वोच्च न्यायालय ने दिया। इस दौरान कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न उठे, जिनमें यह भी शामिल था कि क्या मानहानि जैसे मामलों में बिना गिरफ्तारी के पूछताछ संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है और यदि राजनीतिक बयानों को अत्यधिक कठोर तरीके से देखा जाएगा, तो यह संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों के लिए चुनौती बन सकता है।









