वाइल्ड लाइफ
09 May, 2026

कोलंबिया के ‘जंगली हिप्पो संकट’ पर भारत तक पहुंची ट्रांसफर योजना, संरक्षण या नियंत्रण पर बहस तेज

कोलंबिया में बढ़ती हिप्पो आबादी को नियंत्रित करने के लिए सरकार और एक भारतीय अरबपति की योजना पर चर्चा जारी है, जिसमें स्थानांतरण और नियंत्रण दोनों विकल्प शामिल हैं।

डोराडाल, 09 मई

कोलंबिया के मध्य क्षेत्र के छोटे से कस्बे डोराडाल में अब हिप्पो की आवाज़ें आम जीवन का हिस्सा बन चुकी हैं। हर दोपहर स्थानीय लोग और पर्यटक झील के किनारे इकट्ठा होते हैं और पानी में तैरते विशाल हिप्पो को देखते हुए समय बिताते हैं। यह दृश्य अब इस क्षेत्र के प्रमुख आकर्षणों में शामिल हो चुका है।

हालांकि वैज्ञानिकों का मानना है कि ये हिप्पो स्थानीय पर्यावरण और लोगों के लिए खतरा बनते जा रहे हैं। इसी बीच सरकार ने इनके नियंत्रण के लिए कुछ हिप्पो को मारने का प्रस्ताव दिया है, वहीं एक भारतीय अरबपति ने 80 हिप्पो को अपनाकर गुजरात स्थित अपने वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित करने की पेशकश की है।

इन हिप्पो की शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी जब कुख्यात मादक पदार्थ तस्कर पाब्लो एस्कोबार ने चार हिप्पो अपने निजी चिड़ियाघर में लाए थे। 1993 में उसकी संपत्तियां जब्त होने के बाद ये हिप्पो यहीं रह गए और प्राकृतिक शिकारी न होने के कारण इनकी संख्या तेजी से बढ़कर लगभग 200 तक पहुंच गई।

वैज्ञानिकों के अनुसार हिप्पो बड़ी मात्रा में अपशिष्ट जल में छोड़ते हैं, जिससे पानी की रासायनिक संरचना बदल जाती है। इससे जल में ऑक्सीजन कम हो जाती है और जलीय पौधों का जीवन प्रभावित होता है, जिससे पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर असर पड़ता है।

दूसरी ओर स्थानीय लोग इन्हें पर्यटन का बड़ा साधन मानते हैं। शहर में हिप्पो की मूर्तियां, स्मृति चिन्ह और हिप्पो सफारी जैसी गतिविधियां अब आम हो चुकी हैं। कई लोग इनके साथ जीवन को आदत मान चुके हैं और इनके संरक्षण की बात करते हैं।

सरकार ने पहले इनकी संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी और इंजेक्शन जैसे उपाय किए थे, लेकिन ये प्रयास महंगे और जोखिमपूर्ण साबित हुए। वैज्ञानिकों का मानना है कि नियंत्रण के लिए इन्हें हटाना अधिक प्रभावी विकल्प हो सकता है, जैसा कि अन्य देशों में भी किया गया है।

अब प्रस्ताव के तहत हिप्पो को 150 किलोमीटर दूर स्थित हवाई अड्डे तक भारी वाहनों से ले जाना और फिर भारत भेजना एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है। इसके बाद लंबी उड़ान के दौरान उनकी सुरक्षा और देखभाल भी कठिन होगी।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि प्रस्तावित वन्यजीव अभयारण्य का क्षेत्र हिप्पो के प्राकृतिक आवास से छोटा है, जिससे वे सीमित स्थान में रहेंगे और मानव पर निर्भर हो सकते हैं। इससे उनके व्यवहार में आक्रामकता बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।

फिलहाल सरकार इस प्रस्ताव पर विचार कर रही है, लेकिन इसे केवल एक पूरक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि नियंत्रण योजना में अभी भी कुछ हिप्पो को हटाने की संभावना बनी हुई है। स्थानीय लोग हालांकि इन्हें मारने के विरोध में हैं और शांतिपूर्ण समाधान की मांग कर रहे हैं।

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